सनातन धर्म की शक्ति सभी को स्वीकार करना और आत्मसात करना ही रहा तिरस्कार, बहिष्कार आदि प्रतिक्रियायें हमारी मानसिकता विचारधारा कार्यसंस्कृति के विपरीत हैं हमने सांस्कृतिक विजय पताका फहराई हमने विजित भूमि पर कदापि सनातन धर्म को मानने की बाध्यता नहीं आरोपित की मौलिक पंथों को पनपने पल्लवित पुष्पित होने का समान अधिकार दिया यह सनातन धर्म की महानता उदारता का अभूतपूर्व अश्रुतपूर्व ज्वलंत उदाहरण है जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् 🚩🙏 सर्वेभ्य: सनातन: सभी का मौलिक धर्म सनातन ही है किसी पंथ को मानने अपना लेने से धर्म नहीं परिवर्तित हो जाता धर्म सदैव एक रहा है और सदैव ही रहेगा ईश्वर के एकत्व को सभी पंथ स्वीकार करते हैं पंथ अनेक हो सकते हैं परन्तु धर्म सदैव एक रहा क्योंकि सार्वभौमिक सर्वमान्य सिद्धांत धर्म ही निर्धारित करता है पूजा पद्धति जीवन पद्धति की भिन्नता से धर्म भिन्न नहीं हो जाता पंथ कोई भी हो पर धर्म एक ही रहेगा जो शाश्वत सत्य ईश्वर तत्व में आस्था विश्वास का मार्ग प्रशस्त करता है और अनुगमन करने वालों के जीवन में प्रकाश, उत्साह का संचार करता है। जय श्री राम 🚩🙏
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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