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Showing posts from January, 2025
राष्ट्र प्रथम यह भाव राष्ट्र को एक भूमि का टुकड़ा नहीं अपितु एक जीवंत दैवी शक्ति मानना है कदाचित इसी भाव से महर्षि अरविन्द, ऋषि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय,प पू डा हेडगेवार,प पू गुरु जी आदि ने मातृभूमि भारत का वंदन किया और विषम परिस्थितियों में पुत्रवत् अपनी भूमिका समझ अपने दायित्व कर्तव्य का निर्वहन किया ऋग्वेद के पृथ्वी सूक्त में माता भूमि: पुत्रोहम् पृथिव्या से हमें ज्ञात होता है हमारा मातृभूमि से भूमि-पुत्र संबंध है अतः मातृभूमि भारत पर आने वाले संकटों एवं गतिरोधों को उत्पन्न करने वाली शक्तियों बाह्य एवं आंतरिक से सजग, जागरूक, सावधान रहना होगा और राष्ट्र धर्म निभाने हेतु सन्नद्ध सचेष्ट रहना होगा आज पराक्रम दिवस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एवं आजाद हिन्द फौज के अप्रतिम बलिदान को हमें स्मरण रख राष्ट्र धर्म कैसे निभाया जाता है इसे सीखना चाहिए बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता एक बाती भी दीपक में जल कर प्रकाश कर ही जाती है पर हम कभी बाती का नाम नहीं लेते कहते हैं दीपक बढ़ गया इदं राष्ट्राय स्वाहा इदं राष्ट्राय इदन्न मम भावेन निष्काम भाव से राष्ट्र, धर्म, संस्कृति की रक्षा प्राण पण से करना ही राष्ट...
भारत एक चिरंतन अजेय संप्रभु मौलिक राष्ट्र रहा सूर्य एवं चंद्र भी ग्रहण ग्रस्त होते हैं परन्तु वह क्षणिक घटना होती है सूर्य एवं चंद्र पुनः अपने प्रकाश, ऊष्मा एवं शीतलता का विस्तार करने लगते हैं उसी प्रकार हमारे राष्ट्र जीवन यात्रा में १२०० वर्षों का दुर्संयोग परकीय आक्रांताओं,सात समुन्दर पार के कालनेमियों के द्वारा कुत्सित मानसिकता से अभिप्रेरित विश्वासघात कर भारत को अपने अधिकार में लेने की षड्यंत्र कूट रचना हमारे कुछ स्वार्थी अपनों के विश्वासघात से किसी हद तक सफलता और राष्ट्र जीवन क्षत-विक्षत होता रहा यह काल खंड हमारे राष्ट्रीय जीवन पर एक आघात रहा भारतीय शौर्य हर पल किसी न किसी रूप में प्रकट होता रहा पर शौर्य विश्वासघात से पराजित होता रहा अदम्य साहस पराभूत होता रहा एक परकीय सत्ता हमारे ऊपर एक छाया के सदृश छाती गयी तत्पश्चात एक कालनेमि विदेशी शक्ति व्यापारी बन शासक बन बैठी इस्लामी जिहाद का ग्रास हमारे देवालय, मातृशक्ति, जनशक्ति बनी और भारत को उम्मा बनाने की असफल प्रयास होते रहे पर बलात् धर्म परिवर्तन, जनसंहार, विध्वंस को झेल कर भी हमारा "स्व"अडिग रहा और भारत को उम्मा बनाने के ...

BHARAT: A ETERNAL CULTURAL NATION WITH CULTURAL ROOTS

BHARAT or INDIA as it is famous as is the first nation of the world with deepest cultural roots rooted in its own intrinsic culture evolved from vedic roots  which gave the concept of divine rule ordained by god's will for the democratic wellness of the common as one sans discrimination under a chosen benevolent King assisted by Ratnins,Purohit,Gramini & Senani and the advisory consultant bodies SABHA&SAMITI coronated through a consecration coronation ceremony called rajyabhishek  administered and presided by the Purohit we can see the importance of DHARMA even the vajnas RAJASUYA,VAJAPEYA&ASHVAMEDHA which were supposed to empower the RAJAN as the divinely ordained and consecrated king was called this whole parts of the whole as kingship gave the power to care under the and guided by the dictates of DHARMA&NITI even the handing over the rajadanda to the king empowering and authorising him to rule over his kingdom and subjects as a father more than aruler  ...