राष्ट्र प्रथम यह भाव राष्ट्र को एक भूमि का टुकड़ा नहीं अपितु एक जीवंत दैवी शक्ति मानना है कदाचित इसी भाव से महर्षि अरविन्द, ऋषि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय,प पू डा हेडगेवार,प पू गुरु जी आदि ने मातृभूमि भारत का वंदन किया और विषम परिस्थितियों में पुत्रवत् अपनी भूमिका समझ अपने दायित्व कर्तव्य का निर्वहन किया ऋग्वेद के पृथ्वी सूक्त में माता भूमि: पुत्रोहम् पृथिव्या से हमें ज्ञात होता है हमारा मातृभूमि से भूमि-पुत्र संबंध है अतः मातृभूमि भारत पर आने वाले संकटों एवं गतिरोधों को उत्पन्न करने वाली शक्तियों बाह्य एवं आंतरिक से सजग, जागरूक, सावधान रहना होगा और राष्ट्र धर्म निभाने हेतु सन्नद्ध सचेष्ट रहना होगा आज पराक्रम दिवस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एवं आजाद हिन्द फौज के अप्रतिम बलिदान को हमें स्मरण रख राष्ट्र धर्म कैसे निभाया जाता है इसे सीखना चाहिए बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता एक बाती भी दीपक में जल कर प्रकाश कर ही जाती है पर हम कभी बाती का नाम नहीं लेते कहते हैं दीपक बढ़ गया इदं राष्ट्राय स्वाहा इदं राष्ट्राय इदन्न मम भावेन निष्काम भाव से राष्ट्र, धर्म, संस्कृति की रक्षा प्राण पण से करना ही राष्ट्र धर्म है और सदैव से भारत की यह राष्ट्रीय कार्य संस्कृति रही है जिसका परिपालन हमारे शूर वीर बप्पा रावल, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी आदि निभाते रहे आत्मबलिदान से स्वातंत्र्य सूर्य को देदीप्यमान रखा आज पुनः हमें उस विजिगीषु अजेय परंपरा को अपनाना होगा और मैं राष्ट्र का हूं और यह राष्ट्र मेरा है और सदैव इसकी रक्षा करना मेरा दायित्व कर्तव्य है यह बोध जगाना ही होगा 🕉️🚩🙏 जयतु सनातनम् जयतु सत्य सनातन वैदिक हिन्दू राष्ट्र अखंड भारतम् 🕉️🚩🙏 जय हिन्द पराक्रम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री कृष्ण 🏹🔱🦚🇮🇳🚩🕉️
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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