भारत एक चिरंतन अजेय संप्रभु मौलिक राष्ट्र रहा सूर्य एवं चंद्र भी ग्रहण ग्रस्त होते हैं परन्तु वह क्षणिक घटना होती है सूर्य एवं चंद्र पुनः अपने प्रकाश, ऊष्मा एवं शीतलता का विस्तार करने लगते हैं उसी प्रकार हमारे राष्ट्र जीवन यात्रा में १२०० वर्षों का दुर्संयोग परकीय आक्रांताओं,सात समुन्दर पार के कालनेमियों के द्वारा कुत्सित मानसिकता से अभिप्रेरित विश्वासघात कर भारत को अपने अधिकार में लेने की षड्यंत्र कूट रचना हमारे कुछ स्वार्थी अपनों के विश्वासघात से किसी हद तक सफलता और राष्ट्र जीवन क्षत-विक्षत होता रहा यह काल खंड हमारे राष्ट्रीय जीवन पर एक आघात रहा भारतीय शौर्य हर पल किसी न किसी रूप में प्रकट होता रहा पर शौर्य विश्वासघात से पराजित होता रहा अदम्य साहस पराभूत होता रहा एक परकीय सत्ता हमारे ऊपर एक छाया के सदृश छाती गयी तत्पश्चात एक कालनेमि विदेशी शक्ति व्यापारी बन शासक बन बैठी इस्लामी जिहाद का ग्रास हमारे देवालय, मातृशक्ति, जनशक्ति बनी और भारत को उम्मा बनाने की असफल प्रयास होते रहे पर बलात् धर्म परिवर्तन, जनसंहार, विध्वंस को झेल कर भी हमारा "स्व"अडिग रहा और भारत को उम्मा बनाने के सारे प्रयास असफल रहे तत्पश्चात आंग्ल काल में अनेकानेक अमानवीय यंत्रणा सहन कर भी हमारे क्रांति वीरों के अप्रतिम बलिदान के द्वारा स्वातंत्र्य की ज्योति ज्योतित रही यह भारत का "स्व" रहा आज हम स्व-तंत्र हैं एवं स्वा-धीन हैं पर क्या उसमें "स्व" है ?आज हम आधीन हैं उस पाश्चात्य अपसंस्कृति, मानसिकता, दृष्टिकोण के जो हमारे राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, वैदिक सनातन धर्म, संस्कार के लिए घातक है और हमारे राष्ट्रीय जीवन एवं सामाजिक जीवन को विषाक्त, विकृत, क्षत-विक्षत कर रहा है परकीय प्रभाव एवं अपसंस्कृति , मानसिकता से मुक्त हो जब तक हम पुनः मौलिक वैदिक सनातन राष्ट्रीय जीवन को नहीं अंगीकार करे�
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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