इस्लामी कट्टरवाद जिहाद का नग्न नृत्य आज उन इकोसिस्टम के भाईचारा और गंगा जमुनी तहजीब वालों की आंख खोलने के लिए पर्याप्त है कि वे समझ लें चारा बनोगे तो भाईचारा और नहीं तो भाईजान है जान का प्यासा और वे जो शुतुरमुर्ग वृत्ति अपनाए रेत में गर्दन गाड़ अपने को सुरक्षित समझ रहे हैं उन्हें जिहाद का मकसद ही इस्लामी राज्य और शरियत है यह समझना आवश्यक है ये गिरगिट की तरह अल तकिया के माध्यम से आंखों में धूल झोंकते रहे और हम अनभिज्ञ अथवा अनदेखा करते रहे उसी का दुष्परिणाम आज सामने है आज बंगलादेश कल भारत और विश्व वैसे भी यू के और फ्रांस में तांडव शुरू हो चुका है भाई साहब सादर प्रणाम जय श्री राम वंदे मातरम् 🚩🙏 जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् जय हिंदुत्वइस्लामी कट्टरवाद जिहाद का नग्न नृत्य आज उन इकोसिस्टम के भाईचारा और गंगा जमुनी तहजीब वालों की आंख खोलने के लिए पर्याप्त है कि वे समझ लें चारा बनोगे तो भाईचारा और नहीं तो भाईजान है जान का प्यासा और वे जो शुतुरमुर्ग वृत्ति अपनाए रेत में गर्दन गाड़ अपने को सुरक्षित समझ रहे हैं उन्हें जिहाद का मकसद ही इस्लामी राज्य और शरियत है यह समझना आवश्यक है ये गिरगिट की तरह अल तकिया के माध्यम से आंखों में धूल झोंकते रहे और हम अनभिज्ञ अथवा अनदेखा करते रहे उसी का दुष्परिणाम आज सामने है आज बंगलादेश कल भारत और विश्व वैसे भी यू के और फ्रांस में तांडव शुरू हो चुका है भाई साहब सादर प्रणाम जय श्री राम वंदे मातरम् 🚩🙏 जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् जय हिंदुत्वइस्लामी कट्टरवाद जिहाद का नग्न नृत्य आज उन इकोसिस्टम के भाईचारा और गंगा जमुनी तहजीब वालों की आंख खोलने के लिए पर्याप्त है कि वे समझ लें चारा बनोगे तो भाईचारा और नहीं तो भाईजान है जान का प्यासा और वे जो शुतुरमुर्ग वृत्ति अपनाए रेत में गर्दन गाड़ अपने को सुरक्षित समझ रहे हैं उन्हें जिहाद का मकसद ही इस्लामी राज्य और शरियत है यह समझना आवश्यक है ये गिरगिट की तरह अल तकिया के माध्यम से आंखों में धूल झोंकते रहे और हम अनभिज्ञ अथवा अनदेखा करते रहे उसी का दुष्परिणाम आज सामने है आज बंगलादेश कल भारत और विश्व वैसे भी यू के और फ्रांस में तांडव शुरू हो चुका है भाई साहब सादर प्रणाम जय श्री राम वंदे मातरम् 🚩🙏 जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् जय हिंदुत्व
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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