भारत किसका ?
कुछ लोगों का कहना है "इस भारत की मिट्टी में सभी का खून मिला है" माटी भी हमारी खून भी इस मिट्टी पर जन्मे होने के कारण और यहाँ का अन्न ग्रहण कर पले बढ़े इस माटी के ही हुए इस बात से हमे कोई इनकार नहीं पर एक बात अवश्य है एक माटी पर संग मिल पले बढ़े लोगों में कुछ लोग फिरकापरस्ती की आंधी मे अपना असली वजूद भारतीयता कैसे भुला बैठे इसकी जड़ों मे जाने पर हम पाते हैं की 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर मे भी मौलवी अर्थात उलेमा वर्ग वतनपरस्त था 1905 के बंग भंग के समय हिन्दू मुस्लिम एक हो बंग भंग का विरोध किए खिलाफत आंदोलन जिसका कोई संबंध भारतीय स्वाधीनता संग्राम से नहीं था उसकअवसर मान मुस्लिम हिन्दू एकता को ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध एक राजनीतिक हथियार के रूप में गांधी जी ने किया यह एक सर्वथा गलत निर्णय था पहली बार मुस्लिम को इस्तेमाल किए जाने का अनुभव हुआ काँग्रेस के निर्माण के पीछे भी अंग्रेजों की हिन्दू मुस्लिम एकता को खत्म करने की साजिश थी एंग्लो मोहम्मदन ओरिएंटल कॉलेज अलीगढ़ जो आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी है वह भी एक अंग्रेजों का गुलदस्ता ही था मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 ढाका ;नाऊ ऑर नेवर पैम्फ्लिट रहमत आली का जिसमे पाकिस्तान एक अलग देश की रूपरेखा थी जो की सर सय्यद के टू नैशन थ्योरी और आलम इकबाल के तराना ए मिल्ली को जिन्नाह के फोर्टीन पॉइंटस का आधार बना और आगे चल जिन्नाह की जिद और डायरेक्ट एक्शन और अंग्रेजों की कगीनेट मिशन प्लान और माऊंटबैटन प्लान जिसमे भारत के बंटवारे का एक खुला चिट्ठा था जिसका संदेश बंटवारा होगा तभी स्वतंत्रता एक छिपी साजिश थी बंटवारे को एक मुद्दा बना एक सियासी खेल खेला गया देश का धार्मिक आधार पर बंटवारा हुआ स्वतंत्रता के बाद नेहरू के प्रधानमंत्री बनाने के बाद हिन्दू विरोधी कानूनों की झड़ी सी लग गई और मुस्लिम को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने की होड़ सी लग गई एक बार गलत इस्तेमाल आज एक परंपरा बन गई अल्पसंख्यक कल्याण और तुष्टीकरण के नाम पे मुस्लिम वोट बॅक को साधने और सत्ता हासिल करने की प्रतियोगिता शुरू हो गई हिन्दू समाज को भी जातियों वर्गों में बाँट कमजोर करने की साजिश रची गई और चली गई हिन्दू वंचित होता गया और हाशिये पर पहुंचता गया इस तरह परंपरागत सर्व धर्म समभाव की जड़ें निहित स्वार्थों के लिए राजनीतिक लाभ के लिए खोद दी गईं जब इस देश में गंगा जामुनी तहजीब के नारे नहीं थे तब क्या धार्मिक सद्भाव नहीं था आज का मुस्लिम जबरन धर्मपरिवर्तित हिन्दू ही है कहने को मजहब इस्लाम( दीन नहीं ) में तो सब बराबर हैं तब 73 जातियाँ कहाँ से आ गईं धर्मपरिवर्तित मुसलमान खालिस नहीं यह बात कई बार कही जा चुकी है यह ताज्जुब की बात है हमवतन हो कर भी यहाँ का आज का मुसलमान कल का हिन्दू जबरन तलवार के डर से कलमा पढ़ा हुआ आज अपनी जन्मभूमि मातृभूमि के विरुद्धह ग़जवा ए हिन्द की साजिश रचने वाले और उन लोगों का साथ देने वाले उन लोगों का जो उनका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करना चाहते हैं और फायदे के लिए वोट पर बिकने को तैयार हैं अब भारत किसका भारत उसका है जो भारत को मातृभूमि पूर्वजों की भूमि भारत माता को माता माने भारत उनका कदापि नहीं जो यहाँ का अन्न जल ग्रहण कर पलें बढ़ें और देश के विरुद्ध साजिश रचने वालों के मंसूबे की ताकत बनें और देश की अखंडता,एकता और संप्रभुता के लिए भविष्य मे खतरा बनें "मर कर भी आएगी खुशबू ए वतन की" ऐसे किरदार राष्ट्रीय चरित्र वाला भारतीय ही हमवतन हो सकता है अन्यथा कोई नहीं वह चाहे कोई भी अपना ही क्यूँ न हो वंदे मातरम
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