भारत में जन्म लेने वाला और मातृभूमि मानने वाला हर व्यक्ति हिंदू ही है पृथक मानसिकता और देशेतर पहचान का ख्वाब देख रहे लोगों को इस देश में रहने का कदापि अधिकार नहीं रह हमारी विशाल हृदयता है कि हम आज तक कुछ कतिपय उन लोगों को सहन कर रहे हैं जो आज भी भारत का अन्न जल ग्रहण करते हुए भी भारत को मातृभूमि मानने से इन्कार करते हैं वंदे मातरम् से दूरी बनाते हैं मदरसों में मस्जिदों में तौहीद गजवा ए हिन्द काफिरों के सफाए का षड्यंत्र रचते हैं रेलवे लाइन पर तोड़फोड़ करते हैं और यह सत्य समझते हुए कि आज का शफीक जो मदरसा मस्जिद मौलवी प्रशिक्षित हो आतंकवाद जिहाद सुनियोजित उपद्रव षड्यंत्र रच रहा है उसके पूर्वज सनातनी ही थे जबरन रलीव सलीव गलीव एक हाथ में तलवार दूसरे में कुरान वाले जिहादी विधर्मी आक्रांताओं ने तलवार का डर दिखाकर धोती छोड़ सलवार पहनने पर मजबूर कर दिया आज का शफीक कभी शरीफ इज्जतदार सनातनी मोहनलाल या रामदास ही रहा होगा अल तकिया के झांसे में देश बंटा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के नाम पर हिंदु विरोधी एजेंडा चला मुस्लिम वोट बैंक को सत्ता पाने की सीढ़ी बनाने वाले लोगों से जो विदेशी इशारों पर नाचने वाले राजनीतिक षड्यंत्रकारी पेशेवर खिलाड़ी जो जातिवाद और वर्गवाद के नाम पर सनातन समाज को तोड़ कर अपनी गुटबंदी वोट बैंक के रूप में सत्ता पाने की लालसा रखने वालों से भी खतरा है आज सनातन समाज को एकजुट सूत्रबद्ध एक राष्ट्र एक पहचान सनातनी हम हिन्दू भारत मां की संतान का मंत्र देने की आवश्यकता है सनातन एकता सनातन रक्षा भारत रक्षा का एकमेव मार्ग है और उस पथ पर अग्रसर होना ही होगा अन्यथा अभी जो खतरा ही है खतना होते देर न लगेगी यह सभी सनातनियों को समझना होगा सनातन एकता सुरक्षित भारत 🕉️🚩🙏 जय हिंदुत्व जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् 🕉️🚩
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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