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Showing posts from January, 2024
 This anti Bharat anti Sanatan trend must be ended by any means remember Shakespeare wrote "Beware the wrath of a patient man" consequences may be disastrous Jayatu Sanatanam Jayatu Bharatam
 सनातन तो बनें जो राष्ट्र धर्म निभाते रहे बप्पा रावल से छत्रपति शिवाजी तक वे सनातन पहले रहे अतः क्षत्रिय धर्म निभाया क्षत्रिय धर्म राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, सनातन धर्म, संस्कारों, स्वाभिमान की रक्षा ही रहा है जब से हम सनातनी राष्ट्र धर्म त्याग जागतिक प्रचलित आरोपित धर्म पर चलने लगे हम विखंडित, राष्ट्र विखंडित होता रहा हम तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति हेतु बंटने लगे कुछ स्वार्थी तत्वों के निहित स्वार्थ के पूर्ति हेतु ग्रास बनते रहे अपने "स्व"को खोते रहे सनातन धर्म, भारत,सनातन संस्कृति की रक्षा सनातन बन ही हम कर सकते हैं और सबसे बड़ा दायित्व क्षत्रिय कुल का है क्योंकि अरिमर्दन हेतु खड्ग वे ही धारण कर सकते हैं यह ईश्वरीय वरदान हमें ही प्राप्त है संपूर्ण समाज को एकजुट रखना भी हमारा ही दायित्व है आज जो क्षत्रिय समाज पर आक्रमण हो रहे हैं वे जे एन यू , अर्बन नक्सल ,वामी मुक्तवाद, राष्ट्र विरोधी,सनातन विरोधी शक्तियों का मिला जुला षड्यंत्र है जो इस बात को जानता समझता है कि ब्राह्मण का ज्ञान और क्षत्रिय का शौर्य ही भारत को एक अखंड एकात्म भारत बना सकता है इसलिए ही जे एन यू की दीवारों पर ब्रा...
 हिंदुस्थान में रहने वाला हर कोई हिन्दू है जैसे हर भारतवासी भारतीय है परंतु सनातनी वही है जो सनातन धर्म, संस्कृति, संस्कार को धारण कर अनुसरण पालन करता है जो गोत्रत: वैदिक ऋषियों के वंशज कहलाने में गौरव अनुभव करता है माता भूमि: पुत्रोहं पृथिव्या का भाव रख भारत को मातृभूमि का मान दे राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, सनातन धर्म (मूल धर्म) की रक्षा हेतु तत्पर रहते हैं मातृभूमि का मान,जय,पराजय, गौरव को अपना समझते हैं और राष्ट्रोत्कर्ष के अभिवृद्धि में अपना योगदान अपना सौभाग्य समझते हैं बेशक इस मिट्टी में सभी का खून शामिल है देश के लिए खून देना, बलिदान सौभाग्य है पर अधिकार की भाव भूमि नहीं हमारा सामर्थ्य कर्तव्य तक है अधिकार पर नहीं १८५७ के स्वातंत्र्य समर में हिंदू मुस्लिम एक साथ लड़े,१९०५ के बंग भंग में भी एक रहे १९०६ में मुस्लिम लीग की स्थापना और १९४० में पाकिस्तान प्रस्ताव एवं जिन्ना के १४ सूत्र, द्विराष्ट्र सिद्धांत, धार्मिक बंटवारा तय होना,सीधी कारवाई ने अल्लामा इकबाल के कौमी तराना "सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा" को मिल्ली तराना"चीनो अरब हमारा सारा जहां हमारा"बना दिया ह...
 Sanatan Rejuvenation is not Saffronisation but Attainment of Selfhood and realisation of Bharat as Bharat by the Bharati Jayatu Sanatanam Jayatu Bharatam 🚩🙏
 आसिंधो सिंधु पर्यंत यस्य भारत भूमिका आज विश्व में सर्वत्र सनातन धर्म, संस्कृति के पगचिह्न प्राप्त हो रहे हैं स‌उदी अरब में ८००० वर्ष प्राचीन मंदिर,अज़रबैजान में मंदिर,चीन में नदी सूखने पर मंदिर, मिस्र में मोसुल डैम के सूखे के कारण सूखने पर वैदिक नगर, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि में लगा स्तान जो स्थान का अपभ्रंश है संस्कृत भाषा का शब्द है, रूसी स्लाव शब्द भी संस्कृत शब्द है,पूरे विश्व में जगह जगह शिव लिंग प्राप्त होना यह सिद्ध करता है कि मातृ शक्ति देवी और पितृ शक्ति शिव की पूजा सर्वत्र प्रचलित थी कालांतर में परिवर्तन आने से सत्य और तथ्य नहीं बदल जाते साक्ष्य सत्य और तथ्य को टिकाऊ धरातल देते हैं दलदली जमीन नहीं हमारी संस्कृति सत्य,तथ्य एवं साक्ष्य पर आधारित है जो अकाट्य, प्रत्यक्ष एवं स्वयं सिद्ध सत्य है सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती सत्य से अनर्गल अनाप-शनाप तर्क यदि टकराते हैं तब सत्य के प्रकाश में वे जैसे तिमिर का अंत सूर्य के प्रकाश में स्वयं हो जाता है वैसे ही वे तर्क अस्तित्वहीन हो जाते हैं ||जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं भारतम्||🚩🙏🚩 https://www.facebook.com/...
 We are the only country on the globe who have been subjected to mental enslavement to our horrific gory past the so called "Mughal Rule"and the "British Rule"the horrifying events which hounded a peaceful Nation destroying it's cultural heritage and waves of genocides of a eternal culture by destruction of temples, massacre and forced conversion a Bharat which stood the time test of waves of invasions still survives due to the sacrifice,valour, fortitude of our chivalrous forefathers like Maharana Pratap, Chatrapati Shivaji, Bappa Rawal etc.and Queen Mothers like Rani Lakshmi Bai,Rani Durgavati etc.did we survive they fought unto death to protect our self respect and nationhood it's a pity a cultural integrated unit Bharat or righteously Akhand Bharat consolidated by Emperor Chandragupta Maurya under the able Father of Statecraft Acharya Chanakya extended to far reaches and reintegrated as a Nation by integrating 565 principalities by foresight and able pr...
  दुनिया कहती है हम पीछे हैं किस चीज में दुनिया २०२२ हम भारतीय वि २०७९ युग ५१२४ आगे जायेंगे तो चकरा जाओगे भ‌इया कल्पों में अगर जायेंगे सबसे लंबी काल गणना का विश्व कीर्तिमान गिनेस बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में कल्प के ही नाम है चतुर्युग मन्वन्तर कल्प कितने बीत चुके हम तब भी थे हैं एवं आगे भी रहेंगे भौतिकता में आगे होगे तुम भोगवादी हो हम अध्यात्म प्रधान योगवादी हैं हमने जीवन त्याग से जिया तुमने संग्रह और तृष्णा में जिया हमने मृत्यु को अमरत्व माना तुमने मृत्यु को अंत हमने निराशा में भी आशा ढूंढ़ी तुम निराशा में भटकते रहे तुम युद्ध ईर्ष्या द्वेश में पलना सीखें हम शांति समत्व सामंजस्य सद्भाव में पले तुम एक ग्रंथ के अनुसार चले हम वैदिक वांग्मय एवं अगणित ग्रंथों के अनुसार चले तुम सब मेरा और हम सब हमारे वसुधैव कुटुंबकम् पर चले तुम भोगवादी हम योगवादी आपके ही यहां किसी ने सही लिखा है east is east west is west never the twain shall meet हमारे बराबर आ सकते हो भ‍इया पर आगे तो सनातन के रूप में हमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने वरदानित किया है वह से वेद वेद से विज्ञान वेद से ही विचार जाने हुए पर तुम्हारा...
 एक लेखक,कवि,विचारक एक ही आयाम के पथिक हैं कल्पना परंतु हम यह भूल जाते हैं कि कल्पना ही साकार करने की प्रेरणा बनती है आज के दृश्य चमत्कार, वस्तुएं भी किसी की कल्पना के ही अंग रहे होंगे जो उस व्यक्ति के अपनी कल्पना को साकार मूर्त रूप में ढालने के लिए अथक साधना का परिणाम है अभिज्ञान शाकुन्तलम महाकवि कालिदास की कल्पना से ही प्रस्फुटित हुई होगी आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की रामायण भी कवि की कल्पना से जन्मी होगी गोस्वामी तुलसीदास जी के रामचरितमानस में कलियुग का वर्णन भविष्य का दर्पण है राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की भारत भारती भारत की यशोगाथा भारत गौरव का सिंहावलोकन है भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का लेख "भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है"आज के पाश्चात्य अपसंस्कृति अंधानुकरण के दृष्टि से कितनी प्रासंगिक है निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा ज्ञान के मिटै न हिय को सूल आज कितनी प्रासंगिक है इसी प्रकार संघ प्रणेता प पू डा हेडगेवार ने हिंदु विखंडन को भांप लिया था और सक्षम,सबल, आत्मनिर्भर स्वयुक्त भारत के लिए हिंदु एकता पर बल दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन की स्थापना की ज...