एक लेखक,कवि,विचारक एक ही आयाम के पथिक हैं कल्पना परंतु हम यह भूल जाते हैं कि कल्पना ही साकार करने की प्रेरणा बनती है आज के दृश्य चमत्कार, वस्तुएं भी किसी की कल्पना के ही अंग रहे होंगे जो उस व्यक्ति के अपनी कल्पना को साकार मूर्त रूप में ढालने के लिए अथक साधना का परिणाम है अभिज्ञान शाकुन्तलम महाकवि कालिदास की कल्पना से ही प्रस्फुटित हुई होगी आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की रामायण भी कवि की कल्पना से जन्मी होगी गोस्वामी तुलसीदास जी के रामचरितमानस में कलियुग का वर्णन भविष्य का दर्पण है राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की भारत भारती भारत की यशोगाथा भारत गौरव का सिंहावलोकन है भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का लेख "भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है"आज के पाश्चात्य अपसंस्कृति अंधानुकरण के दृष्टि से कितनी प्रासंगिक है निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा ज्ञान के मिटै न हिय को सूल आज कितनी प्रासंगिक है इसी प्रकार संघ प्रणेता प पू

डा हेडगेवार ने हिंदु विखंडन को भांप लिया था और सक्षम,सबल, आत्मनिर्भर स्वयुक्त भारत के लिए हिंदु एकता पर बल दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन की स्थापना की जो तंत्र=शाखा पद्धति; यंत्र=स्वयंसेवक एवं मंत्र=संघ प्रार्थना से हिंदू को समरस, राष्ट्र भाव से युक्त, राष्ट्र धर्म हेतु त्याग,समर्पण, भक्ति का प्रेरणा स्रोत बन रहा है और अगणित हृदय में राष्ट्र चेतना जागृत करने में लगा हुआ है "साधना का दीप ले निष्कंप हाथों बढ़ रहे निज ध्येय पथ साधक निरंतर" इदं राष्ट्राय स्वाहा इदं राष्ट्राय इद्न्न मम जयतु सनातनम् जयतु भारतम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् 🚩🙏🚩

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