सनातन तो बनें जो राष्ट्र धर्म निभाते रहे बप्पा रावल से छत्रपति शिवाजी तक वे सनातन पहले रहे अतः क्षत्रिय धर्म निभाया क्षत्रिय धर्म राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, सनातन धर्म, संस्कारों, स्वाभिमान की रक्षा ही रहा है जब से हम सनातनी राष्ट्र धर्म त्याग जागतिक प्रचलित आरोपित धर्म पर चलने लगे हम विखंडित, राष्ट्र विखंडित होता रहा हम तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति हेतु बंटने लगे कुछ स्वार्थी तत्वों के निहित स्वार्थ के पूर्ति हेतु ग्रास बनते रहे अपने "स्व"को खोते रहे सनातन धर्म, भारत,सनातन संस्कृति की रक्षा सनातन बन ही हम कर सकते हैं और सबसे बड़ा दायित्व क्षत्रिय कुल का है क्योंकि अरिमर्दन हेतु खड्ग वे ही धारण कर सकते हैं यह ईश्वरीय वरदान हमें ही प्राप्त है संपूर्ण समाज को एकजुट रखना भी हमारा ही दायित्व है आज जो क्षत्रिय समाज पर आक्रमण हो रहे हैं वे जे एन यू , अर्बन नक्सल ,वामी मुक्तवाद, राष्ट्र विरोधी,सनातन विरोधी शक्तियों का मिला जुला षड्यंत्र है जो इस बात को जानता समझता है कि ब्राह्मण का ज्ञान और क्षत्रिय का शौर्य ही भारत को एक अखंड एकात्म भारत बना सकता है इसलिए ही जे एन यू की दीवारों पर ब्राह्मणों को धमकी दी गई और अब क्षत्रिय तेज को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है आज हमें एकजुट होकर एक-दूसरे के लिए खड़े,डटे रहने की आवश्यकता है जब भी हम बंटे,टूटे,बिखरे पर जब भी हम बंटे, खड़े हुए इतिहास रचे जय मां भवानी जय राजपुताना जय क्षात्र धर्म
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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