अखंड भारत~ सुरक्षित,समर्थ,संप्रभु सांस्कृतिक राष्ट्र
समर्थ भारत ही सुरक्षित भारत हो सकता है अन्यथा कदापि नहीं प्राकृतिक रूप से देवनिर्मित भारत भूमि यथा उत्तरं यत समुद्रस्य हिमाद्रशचैव दक्षिणम वर्षं तद भारतम नाम भारती यात्रा संततिः एवं आसिन्धु सिंधु पर्यंत यस्य भारत भूमिका मातृभू से तात्पर्य है भारत की सीमाओं से अर्थात राष्ट्रीय सीमा भारत की सांस्कृतिक सीमा का निर्धारण सहज नहीं है क्यूंकी पूरे दृश्यमान जगत मे वह फैली थी विश्व मे अनेकों देशों मे भारतीय संस्कृति अथवा सनातन संस्कृति के पदचिन्ह प्राप्त होते हैं यह सिद्ध करता है की सम्पूर्ण विश्व मे इसका विस्तार था उत्खनन मे शिव लिंग एवं योनि अर्थात शिव शक्ति के प्रतीक प्राप्त होते हैं इससे सिद्ध होता है की सम्पूर्ण विश्व में शिव अर्थात पुरुष शक्ति एवं शक्ति अर्थात स्त्री शक्ति की पूजन परंपरा प्रचलन मे थी विश्व के सभी सभ्यताओं मे देव देवी परंपरा प्राप्त होती है यूनान मिस्र रोमन सभी मे यह पाया जाता रहा है देवोत्पत्ति के सिद्धांत प्रायः एक जैसे ही हैं दैवी एवं आसुरी शक्तियों का संघर्ष सत्य की असत्य अधर्म पर विजय ही धर्म का आधार रहा है अधर्म का प्राबल्य एवं दैवी शक्तियों का पुंजीभूत हो अवतार अथवा पुण्यात्माओं के रूप मे और दैवी सामर्थ्य अथवा सहयोग से धर्म की प्रतिस्थापना करना ही था सत्य एवं असत्य के युद्ध को ही देवासुर संग्राम कहा गया ईश्वर का अनेकों रूपों मे अवतार का हेतु भी धर्म स्थापना ही थी और आसुरी शक्तियों का नाश ही उसका हेतु अवतार की अवधारणा सनातन धर्म की एक प्रतिष्ठित स्थापना है और यह सभी सभ्यताओं मे प्राप्त होती है अन्य सभ्यताओं मे अन्य पंथों के धर्मावलंबियों का उत्पीड़न होता पाया जाता है एक सनातन धर्म एवं भारत मे अन्य पंथों के सताये लोगों को शरण एवं सम्मान मिला और अपने पंथ की पूजा पद्धति को स्वतंत्र रूप से पालन पोषण का अधिकार रहा हमने कभी किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया न प्रलोभन से अथवा बल से सर्व पंथ समभाव हमारा उच्च आदर्श रहा विश्व मांगल्य सर्वे भवन्तु सुखिनः,वसुधैव कुटुंबकम का संदेश सम्पूर्ण विश्व मे हम प्रसारित,प्रचारित,पालित करते रहे हमने सहिष्णुता को अपना आदर्श माना पर यही हा मारी शक्ति और दुर्बलता भी रही परकीय आक्रमण कई चरणों मे होते रहे कदाचित भारत की प्राकृतिक सीमाओं की उपेक्षा इन आक्रमणों का कारण बनी और अत्यधिक विश्वास अपने जैसा ही सबको समझना इसी का परिणाम था कि कोई सीमा पार कर लुटेरे के रूप मे आॅ धमके और उन्हे हमने साधारण लुटेरे समझ बैठे लेकिन हम यह समझ नहीं सके की ये वही है जो इस्लाम की जिहादी चादर पूरे विश्व को धर्मांतरित कर इस्लाम का परचम बुलंद करना था और वे हमारे मंदिरों को तोड़ कर मस्जिदें खड़ी करते रहे और हामारी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जबरन धर्मांतरण रलीव सलीव गलीव नरसंहार करते अपना शासन भी स्थापित कर बैठे यह इस्लाम का भारत मे प्रवेश था आंतरिक फूट और राष्ट्रद्रोह ने हामारी जड़ों को कमजोर किया दूसरी ऑर से यूरोपीय शक्तियों ने व्यापार के बहाने प्रवेश किया उन्मे आपस मे भारत पर वर्चस्व के लिए युद्ध होते रहे अंततः अपनी नौसैनिक शक्ति से अंग्रेजों ने अपना प्रभुत्व स्थापित कर ही लिया भारत को कच्चे माल का स्रोत और ख्रिस्ती पंथ मे धर्मांतरित करना ही उनका प्रमुख उद्देश्य था दोनों ही परकीय शक्तियों का भारत पर शासन करना ही उद्देश्य रहा था भारत के प्रबल प्रतिरोध के बावजूद कुछ गद्दारों के आक्रान्ताओं के साथ मिल जाने से प्रतिरोध अप्रभावी रहे इस विमर्श मे हमने देखा की सीमाओं की उपेक्षा,आंतरिक फूट एवं राष्ट्रद्रोह एक संप्रभु समर्थ सरवागुनसम्पन्न राष्ट्र को कैसे घुटने पर ला दिए आज भी कमोबेश परिस्थितियाँ वैसी ही हैं आज भी देशद्रोहियों की संख्या राष्ट्रभक्तों से अधिक है राष्ट्र का साथ देने की अपेक्षा बहुतेरे आक्रमणकारियों और भारत विरोधी शक्तियों का साथ दे रहे हैं उस समय प्रत्यक्ष आक्रमण होते थे और उनका प्रतिरोध संभव था पर आज के टेक्नोलॉजी युग मे संचार क्रांति से इन्फो वार का संकट बढ़ गया है और इस अप्रत्यक्ष आक्रमण से हामारी अखंडता,समरसता ,एकात्मता,संप्रभुता सभी संकट मे हैं इन वाह्य शक्तियों का साथ देने वाली शक्तियां हमारे अपने अधिक हैं यह सबसे अधिक चिंता का विषय है प्रत्यक्ष आक्रमण का सामना सरल है पर अप्रत्यक्ष आक्रमण अधिक घातक होते हैं अखंड भारत सर्वदा सुरक्षित रहा भारत के विखंडित होने का दुष्परिणाम भारत क प्राकृतिक सीमाओं का aबेदया सुरक्षा कवच का टूटना रहा अखंड भारत सुरक्षित,समरस,एकात्म रहा हामारी संस्कृति,संस्कार,स्वधर्म अर्थात सत्य वैदिक सनातन धर्म अपने मंदिर,गुरुकुल,सामाजिक व्यवस्था,संस्कार सभी सुरक्षित रहे परकीय आक्रमणों के फलस्वरूप हम विदेशी सभ्यताओं के दुष्प्रभावों के फलस्वरूप हम अपनी निज संस्कृति गौरव को भूलते गए और विदेशी प्रभाव मे रंगते गए यह हमारा सबसे बाद दुर्भाग्य और विडंबना रही यह भारत को और हमारे सांस्कृतिक कवच पर निरतर आघात कर उसे कमजोर करती रही इन विपरीत परिस्थितियों मे आज भी हमारे बचे रहने का मूलभूत कारण एवं संबल है हमारा वैदिक सनातन धर्म ही रहा आज भी हम उसी सनातन धर्म पर चलते रहने और आगामी पीढ़ी को भी चलने के प्रेरणा स्रोत बनाना ही है यह हमे समझना होगा एक राष्ट्र का संभाल उसकी भाषा,संस्कृति,संस्कार एवं स्वधर्म ही होता है जिस राष्ट्र ने अपनी इन परंपराओं का संरक्षण,पोषण एवं सुरक्षा की वह राष्ट्र सुरक्षित रहा अन्यथा उसने राष् सभ्यता,संस्कृति,मौलिक पंथ, मौलिक पहचान, नाम एवं अस्तित्व खो इतिहास बन कर रह गया अतः इस हेतु हमे सचेत,सतर्क,सजग रहने की अधिक आवश्यकता है तभी हम एक अखंड,सुरक्षित,समर्थ एकात्म सांस्कृतिक एक राष्ट्र भारत के रूप मे अपने को स्थापित सुरक्षित संप्रभु रख पाएंगे अन्यथा कदापि नहीं वंदे मातरम
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