यतो धर्मस्ततो जय: धर्माचार्य अर्थात सनातन धर्म में जगद्गुरु शंकराचार्य का आदेश अनुशासन ही सर्वोपरि एवं सर्वमान्य है ईसाई पोप के आदेश, इस्लाम इमाम के आदेश पर चलता है भारत को एक सूत्र में एक आस्था एक दर्शन एक विचार क्रांति में बांधने का कार्य आदि शंकराचार्य ने किया राष्ट्र एक राष्ट्र भाव से ही बांधा जा सकता है भारत की चैतन्य शक्ति हमारी आध्यात्मिक चेतना परंपरा रही है जिसका पोषण हमारे आध्यात्मिक आचार्य प्रवरों ने ही किया आचार्य चाणक्य भी एक आध्यात्मिक आचार्य थे जिन्होंने भारत को एक सूत्र में बांध परकीय आक्रांता के विरुद्ध एक राष्ट्र एक भाव अखंड भारत को एक प्रतिरोध प्रतिकार के लिए खड़ा कर सम्राट चन्द्रगुप्त का चयन कर अलक्षेन्द्र के आक्रमण को विफल कर एक अखंड भारत साम्राज्य को जन्म दिया भारत जब भी विषम परिस्थितियों में फंसा भारत ने अपने किसी न किसी पुत्र पुत्री को अपने स्व की रक्षा हेतु खड़ा किया है मुस्लिम आक्रांताओं के विरुद्ध भी एक वीर परंपरा बप्पा रावल महाराणा प्रताप छत्रपति शिवाजी छत्रपति शंभूराजे आदि अनेक ज्ञात अज्ञात वीरों को खड़ा करती रही जिन्होंने मातृभूमि के स्व की रक्षा हेतु आत्मबलिदान कर हमारे स्वाभिमान को रक्षित किया जब आंग्ल आक्रमण हुआ तब भी चाफेकर बन्धु, वासुदेव बलवंत फडके, खुदीराम बोस ने परकीय शासन के समक्ष प्रतिकार प्रतिशोध की अजेय परंपरा स्वाभिमान स्वातंत्र्य भाव के जीवित रखा नेता जी सुभाष चन्द्र बोस एवं आजाद हिन्द फौज उसी परंपरा का ही नैरन्तर्य रहा इस वीर प्रसूता भारत पर जब तक न दैन्यं न पलायनम् एवं विजिगीषु परंपरा का अनुपालन एवं स्वयमेव मृगेन्द्रता पर विश्वास करने वाली जीवित परंपरा है भारत सुरक्षित, समर्थ, सशक्त रहेगा इस परंपरा को जीवित रखना हमारा दायित्व कर्तव्य है यह राष्ट्रीय चेतना, चरित्र के व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण से सांस्कृतिक अखंड भारत एवं राष्ट्रीय चेतना एवं एकात्मता से ही संभव है यह समझना आवश्यक है और इसका सदैव हमें बोध रहे
वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिता 🕉️ 🚩 जय मां भारती 🚩 🙏
https://youtu.be/3f_8CZVKbpQ?feature=shared
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