भारत जागरण संस्कार केन्द्रित राष्ट्र केन्द्रित
हमारा राष्ट्र चिरंतन सनातन वैदिक राष्ट्र रहा है और हमारी सनातन वैदिक धर्म प्राण संस्कृति सदानीरा अक्षुण्ण धारा के रूप में अनादि काल से प्रवाहित होती आ रही है अतः भारतवर्ष को एकात्म, अखंड, सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक बनाए रखने के लिए हमें संस्कृति केंद्रित एवं राष्ट्र केंद्रित होना पड़ेगा हम एक भाव राष्ट्र भाव से ही एकजुट, संगठित, एकात्म रहते आए हैं भाषा,वेष भूषा, क्षेत्रीय विभिन्नता के होते हुए भी हम *संस्कृति* से एक रहे यथा एक कमल अपनी विभिन्न पंखुड़ियों के साथ ही कमल के रूप में पहचाना जाता है पृथकत: नहीं वैसे ही भारतवर्ष की पहचान अपनी विभिन्नता में सांस्कृतिक एकात्मता एकरूपता से सदैव पहचान पाता रहा है यही अनेकता में एकता हमारा वैशिष्ट्य है हम, वयं आदि हमारी नैसर्गिक अस्मिता है हम एक संस्कृति, एक विचार परंपरा, एक औत्सविक परंपरा, एक जीवन पद्धति, जीवन शैली का पालन करते हैं जो हमारे ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त सनातन धार्मिक, दार्शनिक, आध्यात्मिक परंपरा है जिसे हम सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म कहते हैं जन मन में राष्ट्र भाव जगा हम राष्ट्र धर्म का बोध स्मरण करा सकने में समर्थ हो सकेंगे जो कि राष्ट्र बोध राष्ट्र भाव एक राष्ट्र एकात्म राष्ट्र भाव के बिना असम्भव है जो राष्ट्रीय चरित्र, चेतना से ही सम्भव है अतः निष्कर्षत: हमें भारतवर्ष को सम्प्रभु, एकात्म, अखंड, अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए माता भूमि: पुत्रोहम् पृथिव्या: भाव से भूमि/राष्ट्र को माता मान अपना पुत्र धर्म/राष्ट्र धर्म निभाने की चेतना को अंतर्चेतना के रूप में जन मन में जगानी होगी और राष्ट्र धर्म यथा राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, सनातन धर्म की रक्षा हेतु सन्नद्ध सचेष्ट सजग हो राष्ट्र धर्म सेवा यज्ञ कुण्ड में समिधा बन तन मन धन की आहुति इदं राष्ट्राय स्वाहा इदं राष्ट्राय इदन्न मम भाव से बननी होगी
जय मां भारती संस्कृति चेतना राष्ट्र चेतना संस्कृति चिंतन राष्ट्र चिंतन राष्ट्र भाव एकात्म राष्ट्र अखंड भारत 🕉️🇮🇳🚩🙏जागो हिन्दू जागो भारत
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