नमोस्तुते भगवद्धवजाय~औत्सविक मनोगत

 गुरु पूर्णिमा पर हम अपने गुरु भगवद्धवज का पूजन-अर्चन करते हैं संघ ने भगवा ध्वज को गुरु के रूप में स्वीकार किया व्यक्ति का पतन सम्भव है परन्तु तत्व का पतन नहीं हो सकता अतः भगवा ध्वज का केसरिया रंग जो त्याग, समर्पण,तप, बलिदान एवं शौर्य का प्रतीक है उसे हमने गुरु स्थान दिया ज्ञात हो कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज भगवा ध्वज ही स्वीकार किया गया था और पं नेहरू ने भी स्वीकार किया था परन्तु वह बात नहीं बन सकी उसके बाद भी वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया रंग सबसे ऊपर रखा गया है भगवा ध्वज अथवा भगवद्धवज सदैव से भारत का स्वीकृत प्रचलित ध्वज रहा है अर्जुन के रथ पर भी केसरिया ध्वज ही था राजपुताना में केसरिया रंग ही लोकप्रिय है और गर्व से धारण , प्रदर्शित करने का प्रचलन है यज्ञ कुंड से निकलने वाली अग्नि शिखा का रंग भी भगवा ही होता है सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग भी भगवा होता है क्षत्रिय धर्म का निर्वहन करने हमारे क्षत्रिय वीर केसरिया बाना धारण करते थे त्याग समर्पण और बलिदान का रंग भगवा ही है और यह भगवा रंग हमें अगणित,अनुकृत,अगेय वीरों, वीरांगनाओं के त्याग, समर्पण और बलिदान का स्मरण कराता है और हमें मातृभूमि, धर्म, संस्कृति की रक्षा,संरक्षण हेतु निष्काम कर्म योगी बन इदं राष्ट्राय स्वाहा इदं राष्ट्राय इदन्न मम भाव से तन-मन-धन से राष्ट्र सेवा, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के महत् कार्य एवं परम वैभव युक्त राष्ट्र निर्माण में संचेष्ट हों और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनें

नमोस्तुते भगवद्धवजाय जय मां भारती 🚩🕉️🙏

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