वैविध्य में एक्य~ भारत का वैशिष्ट्य

 आज यह दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी शंम्भा जी जैसे धर्म रक्षक हिंदुत्व के पुरोधाओं की भूमि पर सत्ता प्राप्त करने के लिए भाषा विवाद खड़ा करने की कोशिश ठाकरे बंधुओं के द्वारा अपने अस्तित्व को बचाने के लिए किया जा रहा है बाला साहब ठाकरे ने भी राजनीतिक शुरुआत मराठा मानुष के मुद्दे से की थी पर उस छवि से वे क्षेत्रीय नेता ही बन सके जब उन्होंने हिंदुत्व को अपनाया वे अखिल भारतीय स्तर पर हिंदुत्व के फायर ब्रांड बन सके थे छत्रपति शिवाजी का , पेशवा बाजीराव प्रथम, शंम्भा जी आदि सभी का लक्ष्य छत्रपति शिवाजी का हिंदवी स्वराज्य ही रहा कृष्णा नदी से अटक वह मराठा स्वप्न नहीं था अपितु छत्रपति शिवाजी का भारत का स्वप्न था, रायगढ़ में ली हिंदु राष्ट्र अखंड भारत की शपथ थी प्रथमत: परकीय शासन जो लगभग भारत पर स्थापित हो चला था उसके विरुद्ध सह्याद्रि का सिंह छत्रपति शिवाजी ने हिंदुत्व का जयघोष एवं हिंदवी स्वराज्य का बीड़ा उठाया और जीवन में निभाया छत्रपति शिवाजी की राज मुद्रा 'प्रतिपच्चंद्र रेखैव वर्धिष्णुर्वंदिता शाह सूनो शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते' संस्कृत में, रायगढ़ में १६७४ में भव्य राज्याभिषेक के पुरोहित काशी के परम विद्वान गागा भट्ट थे, वैदिक पद्धति से राज्याभिषेक हुआ यह राज्याभिषेक आवश्यक था देहली में बैठे औरंगज़ेब को चुनौती देने के लिए इस लिए ही छत्रपति शिवाजी ने 'हिंदु पद पादशाही' धारण की औरंगज़ेब की 'बादशाही' को चुनौती देने के लिए छत्रपति शिवाजी ने मावलों को संगठित कर सैन्य प्रशिक्षण दे सेना खड़ी की और मुगल सेना को पग पग पर छठी का दूध याद कराते रहे और औरंगज़ेब की नाक में दम कर दिया औरंगज़ेब को देहली छोड़ दक्कन में डेरा डालना पड़ा और वहीं उसके जीवन का अंत भी हुआ यह पृष्ठभूमि है महाराष्ट्र की आज मुंबई का बौलीवुड हिंदी सिनेमा के चलते विख्यात है सम्पूर्ण भारत से लोग मुंबई में एन केन प्रकारेण कितनी कठिनाई झेल कर अपनी सफलता के झंडे गाड़ते हैं जैसे भारत सभी का है वैसे ही 'आमची मुंबई' किसी एक की नहीं अपितु सभी की है भाषा, प्रांत,जीवन शैली,खान पान भूषा आदि से ऊपर उठकर मुंबई, महाराष्ट्र के विकास, प्रगति,सर्वोन्नति में हर *भारतीय* का योगदान है राजनीतिक हथकंडों से सत्ता सिद्धि एक खतरनाक षड्यंत्र है और यह राष्ट्र की एकता, अखंडता, एकात्मकता के लिए एक गम्भीर आसन्न संकट है और इसका निर्मूलन आवश्यक है और हमें राष्ट्र प्रथम पर बल देना होगा हम सर्वप्रथम एक राष्ट्र हैं भाषा,भूषा, प्रांत, जीवन शैली के अन्तर हमें बांट नहीं सकते हमें बांध अवश्य सकते हैं जैसे कमल की पंखुड़ियां अलग हो कर भी आपस में बंध एक कमल के पुष्प को सर्वांगपूर्ण आकार देते हैं हमारी *वैविध्य में एक्य* हमारे राष्ट्र का सौंदर्य एवं वैशिष्ट्य है

वन्दे मातरम् 🇮🇳🙏

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