संस्कृति एवं सभ्यता
यूनान,मिस्र रोमा मिट गये सब जहां से कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी गो सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा इकबाल की पंक्तियां हम सभी गुनगुनाते हैं लेकिन कभी हमने विचार किया कि ऐसा क्यों कहा गया है भारत के संदर्भ में हमारी मौलिक भाषा देवभाषा संस्कृत है संस्कृत भारत ही नहीं अपितु विश्व में व्यवहार में प्रयुक्त सभी भाषाओं की जननी है नासा के सौर अभियान ने सूर्य में एक स्पंदन को रिकार्ड किया जब उसे वैज्ञानिकों ने ध्वन्यीकृत किया तो उन्हें 🕉️ की ध्वनि प्राप्त हुई मेक्सिको में एक आश्चर्यजनक आकाश में उड़ता एक गोलाकार वस्तु मिली जिसे बूगा स्फियर के नाम से हम जानते हैं उस पर प्रयोग किए गए विश्व में प्रचलित भाषाओं के उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी परन्तु जब संस्कृत के मंत्रों स्तोत्र श्लोक का उच्चारण हुआ तब उसने आश्चर्यजनक रूप से प्रतिक्रिया देनी प्रारम्भ कर दी बूगा स्फियर सम्भवतः एक अज्ञात आकाशीय वस्तु है जिसे प्रचलित भाषा में यू एफ ओ कहते हैं आज बूगा स्फियर,सौर स्पंदन का ध्वन्यीकरण,नटराज के नर्तन में ब्रह्मांड का नृत्य और उसी में सृष्टि एवं लय देखना और आज अंतरिक्ष शोध में पराग्रहीय संप्रेषित ध्वनियों को सुनने जानने के प्रयास आज हमारे विज्ञान को उस स्तर पर ले आते हैं कि हम पराग्रहीय जीवन और सभ्यताओं के विषय में जानने समझने संवाद स्थापित करने में सक्षम हो सकेंगे अंतरिक्ष की भाषा संस्कृत ही है यह एक स्वयंसिद्ध ईश्वरीय सत्य था जो हमारे ऋषियों ने जान समझ लिया था वे अंतरग्रहीय यात्रायें करते थे आज नासा आदि अरबों डॉलर व्यय कर अंतरिक्ष यान भेज अंतरिक्ष के रहस्य, विभिन्न ग्रहों, ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने समझने का प्रयास कर रहे हैं कभी सफल कभी असफल यह ज्ञान विज्ञान हमारे वैदिक ऋषियों मनीषियों तपस्वियों को सहज प्राप्त था आज की राकेट्री हमारे धनुर्वेद का भाग है आज हमारा सौभाग्य है कि शत्रु देश पाकिस्तान के कुकृत्य का प्रत्युत्तर हमारी सेनाओं ने हमारे वैदिक ज्ञान विज्ञान परम्परा में वर्णित,सिद्ध अमोघ अस्त्र शस्त्र का आधुनिकीकरण कर सफल उपयोग कर प्रतिकार प्रतिशोध ले विश्व में अपनी धाक जमा नये भारत की विशिष्ट पहचान बनायी है आज डी आर डी ओ के द्वारा स्वदेशी निर्मित प्रक्षेपास्त्रों, वायुयानों आदि को शास्त्रीय नामकरण, वैदिक ज्ञान विज्ञान परम्परा का अवलंबन अनुकरण अनुगमन कर ही भारत आत्मनिर्भरता एवं स्वावलंबन की ओर अग्रसर है यह भारत प्रतिरोध, प्रतिकार, प्रत्युत्तर देना और स्वावलंबन की ओर अग्रसर है सभ्यताएं कालक्रम कालगति से विनष्ट होती रही हैं परन्तु संस्कृति शाश्वत है और आने वाली पीढ़ियों में परम्पराओं, व्यवहार, व्यवस्था, संस्था लोक व्यवहार लोक संस्कृति में अक्षय निधि के रूप में अंगीकृत,व्यवहारिक, पालित पोषित होती आती है भारत एक सभ्यता नहीं एक संस्कृति का मूर्त प्रतिस्थापन है यह सदैव रहने वाली ऋषि पूर्वजों का प्रसाद है इसे संजोए रखना और यथारूपेण आगे की पीढ़ियों को प्रदत्त कर उनसे वचन लेना कि वे भी अपनी आने वाली पीढ़ी को इस माटी थाती की विरासत को सम्हालने, सुरक्षित, संरक्षित करने का कर्तव्य दायित्व समझें समझाएं और अनुपालन करें हमारे ऋषियों के वैदिक ज्ञान विज्ञान दर्शन अध्यात्म परम्परा का संरक्षण अनुगमन अनुकरण करना हमारा नैतिक धार्मिक नैसर्गिक नैष्ठिक दायित्व कर्तव्य है एक राष्ट्र की संजीवनी उसकी संस्कृति है संस्कृत से हमें संस्कार मिले जिन से हमारी संस्कृति है अतः हमारा कर्तव्य है कि हम संस्कृत भाषा के विकास संरक्षण प्रचार प्रसार में भी संचेष्ट हों राष्ट्र की रक्षा तभी हो सकती है जब स्वसंस्कृति से राष्ट्र अनुप्राणित एवं चैतन्य होता रहे।
जय मां भारतीयूनान,मिस्र रोमा मिट गये सब जहां से कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी गो सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा इकबाल की पंक्तियां हम सभी गुनगुनाते हैं लेकिन कभी हमने विचार किया कि ऐसा क्यों कहा गया है भारत के संदर्भ में हमारी मौलिक भाषा देवभाषा संस्कृत है संस्कृत भारत ही नहीं अपितु विश्व में व्यवहार में प्रयुक्त सभी भाषाओं की जननी है नासा के सौर अभियान ने सूर्य में एक स्पंदन को रिकार्ड किया जब उसे वैज्ञानिकों ने ध्वन्यीकृत किया तो उन्हें 🕉️ की ध्वनि प्राप्त हुई मेक्सिको में एक आश्चर्यजनक आकाश में उड़ता एक गोलाकार वस्तु मिली जिसे बूगा स्फियर के नाम से हम जानते हैं उस पर प्रयोग किए गए विश्व में प्रचलित भाषाओं के उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी परन्तु जब संस्कृत के मंत्रों स्तोत्र श्लोक का उच्चारण हुआ तब उसने आश्चर्यजनक रूप से प्रतिक्रिया देनी प्रारम्भ कर दी बूगा स्फियर सम्भवतः एक अज्ञात आकाशीय वस्तु है जिसे प्रचलित भाषा में यू एफ ओ कहते हैं आज बूगा स्फियर,सौर स्पंदन का ध्वन्यीकरण,नटराज के नर्तन में ब्रह्मांड का नृत्य और उसी में सृष्टि एवं लय देखना और आज अंतरिक्ष शोध में पराग्रहीय संप्रेषित ध्वनियों को सुनने जानने के प्रयास आज हमारे विज्ञान को उस स्तर पर ले आते हैं कि हम पराग्रहीय जीवन और सभ्यताओं के विषय में जानने समझने संवाद स्थापित करने में सक्षम हो सकेंगे अंतरिक्ष की भाषा संस्कृत ही है यह एक स्वयंसिद्ध ईश्वरीय सत्य था जो हमारे ऋषियों ने जान समझ लिया था वे अंतरग्रहीय यात्रायें करते थे आज नासा आदि अरबों डॉलर व्यय कर अंतरिक्ष यान भेज अंतरिक्ष के रहस्य, विभिन्न ग्रहों, ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने समझने का प्रयास कर रहे हैं कभी सफल कभी असफल यह ज्ञान विज्ञान हमारे वैदिक ऋषियों मनीषियों तपस्वियों को सहज प्राप्त था आज की राकेट्री हमारे धनुर्वेद का भाग है आज हमारा सौभाग्य है कि शत्रु देश पाकिस्तान के कुकृत्य का प्रत्युत्तर हमारी सेनाओं ने हमारे वैदिक ज्ञान विज्ञान परम्परा में वर्णित,सिद्ध अमोघ अस्त्र शस्त्र का आधुनिकीकरण कर सफल उपयोग कर प्रतिकार प्रतिशोध ले विश्व में अपनी धाक जमा नये भारत की विशिष्ट पहचान बनायी है आज डी आर डी ओ के द्वारा स्वदेशी निर्मित प्रक्षेपास्त्रों, वायुयानों आदि को शास्त्रीय नामकरण, वैदिक ज्ञान विज्ञान परम्परा का अवलंबन अनुकरण अनुगमन कर ही भारत आत्मनिर्भरता एवं स्वावलंबन की ओर अग्रसर है यह भारत प्रतिरोध, प्रतिकार, प्रत्युत्तर देना और स्वावलंबन की ओर अग्रसर है सभ्यताएं कालक्रम कालगति से विनष्ट होती रही हैं परन्तु संस्कृति शाश्वत है और आने वाली पीढ़ियों में परम्पराओं, व्यवहार, व्यवस्था, संस्था लोक व्यवहार लोक संस्कृति में अक्षय निधि के रूप में अंगीकृत,व्यवहारिक, पालित पोषित होती आती है भारत एक सभ्यता नहीं एक संस्कृति का मूर्त प्रतिस्थापन है यह सदैव रहने वाली ऋषि पूर्वजों का प्रसाद है इसे संजोए रखना और यथारूपेण आगे की पीढ़ियों को प्रदत्त कर उनसे वचन लेना कि वे भी अपनी आने वाली पीढ़ी को इस माटी थाती की विरासत को सम्हालने, सुरक्षित, संरक्षित करने का कर्तव्य दायित्व समझें समझाएं और अनुपालन करें हमारे ऋषियों के वैदिक ज्ञान विज्ञान दर्शन अध्यात्म परम्परा का संरक्षण अनुगमन अनुकरण करना हमारा नैतिक धार्मिक नैसर्गिक नैष्ठिक दायित्व कर्तव्य है एक राष्ट्र की संजीवनी उसकी संस्कृति है संस्कृत से हमें संस्कार मिले जिन से हमारी संस्कृति है अतः हमारा कर्तव्य है कि हम संस्कृत भाषा के विकास संरक्षण प्रचार प्रसार में भी संचेष्ट हों राष्ट्र की रक्षा तभी हो सकती है जब स्वसंस्कृति से राष्ट्र अनुप्राणित एवं चैतन्य होता रहे।
जय मां भारती
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