नमकहरामी को धार्मिक मान्यता इस्लाम ने दी मज़हब न कि दीन आज मज़हबी मोहम्मदी जुनून में इस्लाम का बेड़ा गर्क हो रहा है मज़हब और दीन के अंतर को समझना आवश्यक है तभी सम्यक मूल्यांकन संभव है असल कुरान तो ईराक और सीरिया अर्थात बगदाद और दमिश्क के बीच खो गयी अध्ययन करने पर यह बात पता चलती है कुरान मजीद के ११४ सूरों में कुछ की रचना मक्का में हुई और कुछ की मदीना में मदीनी सूरे अशांति वाले हैं उनके अपेक्षा मक्के वाले शांत पर सबसे बड़ी बात जिस किताब का बिस्मिल्लाह ही ला इलाहा इल्लल्लाह से शुरू होता है अल्लाह के सिवा कोई नहीं यह सिद्ध करता है ऐसे मज़हब का रोड मैप पूरे विश्व पर हुकूमत ए इस्लाम एक इमाम के नेतृत्व में ही हो सकता है तमाम तंज़ीमें जो जिहाद,गज़वा के लिए आज उठ खड़ी हैं उनका मकसद तराना ए मिल्ली की पंक्तियों मुस्लिम हैं हमवतन हैं सारा जहां हमारा को चरितार्थ साकार करना है यह हमें समझना होगा तभी आज की एवं आने वाले भविष्य की तस्वीर समझ सकेंगे - विचार करें वक्त की नज़ाकत को समझें जय हिंदुत्व जय हिंदु राष्ट्र अखंड भारत एक्यं सनातनम् जयतु भारतम् 🚩🙏

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