नमकहरामी को धार्मिक मान्यता इस्लाम ने दी मज़हब न कि दीन आज मज़हबी मोहम्मदी जुनून में इस्लाम का बेड़ा गर्क हो रहा है मज़हब और दीन के अंतर को समझना आवश्यक है तभी सम्यक मूल्यांकन संभव है असल कुरान तो ईराक और सीरिया अर्थात बगदाद और दमिश्क के बीच खो गयी अध्ययन करने पर यह बात पता चलती है कुरान मजीद के ११४ सूरों में कुछ की रचना मक्का में हुई और कुछ की मदीना में मदीनी सूरे अशांति वाले हैं उनके अपेक्षा मक्के वाले शांत पर सबसे बड़ी बात जिस किताब का बिस्मिल्लाह ही ला इलाहा इल्लल्लाह से शुरू होता है अल्लाह के सिवा कोई नहीं यह सिद्ध करता है ऐसे मज़हब का रोड मैप पूरे विश्व पर हुकूमत ए इस्लाम एक इमाम के नेतृत्व में ही हो सकता है तमाम तंज़ीमें जो जिहाद,गज़वा के लिए आज उठ खड़ी हैं उनका मकसद तराना ए मिल्ली की पंक्तियों मुस्लिम हैं हमवतन हैं सारा जहां हमारा को चरितार्थ साकार करना है यह हमें समझना होगा तभी आज की एवं आने वाले भविष्य की तस्वीर समझ सकेंगे - विचार करें वक्त की नज़ाकत को समझें जय हिंदुत्व जय हिंदु राष्ट्र अखंड भारत एक्यं सनातनम् जयतु भारतम् 🚩🙏
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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