रावी की शपथ तब तक अधूरी जब तक भारत अखंड नहीं हमारे स्वातंत्र्य वीरों ने अखंड भारत का स्वप्न पाला था उनके बलिदान इस लिए थे कि वे तो अखंड स्वतंत्र भारत को नहीं देख सकेंगे लेकिन बाती बन जलते रहे और अपना बलिदान दे स्वातंत्र्य की विजिगिषा जगाये रखी कि एक दिन आने वाली पीढ़ियां स्वातंत्र्य सूर्योदय देख सकेंगी यह सदैव होता रहा है दीपक बाती और तैल के संयोग से बनता है बाती भी तैल पा जलती रहती है तैल भी अपने अस्तित्व को तिरोहित करता रहता है और इस अनुपम बलिदान का आधार दीपक बनता है इन तीनों के योगदान बलिदान से अंधकार का नाश हो प्रकाश का संचार प्रसार होता है परतंत्र भारत जिसका भविष्य अंधकारमय हो चला था हम एक अंतहीन श्याम विवर में खिंचते चले जा रहे थे हमें रक्षित करने वाले हमारे स्वातंत्र्य वीर थे जिन्होंने आत्माहुति दे आज हमें एक स्वतंत्र भारत दिया पर विडंबना यह है कि जिस समग्र भारत के लिए सब संघर्षरत रहे वह भारत का अखंड स्वरूप कुछ स्वार्थी सत्ता लोलुप छल प्रपंच पाषंड कूट रचित षड्यंत्र का ग्रास बन गया यह भारत का और हमारा दुर्भाग्य रहा आज भी कुछ वैसी ही षड्यंत्रकारी शक्तियों ने डेरा डाल लिया है और विभाजनकारी प्रवृत्तियों की ओर राष्ट्र को धकेलने का प्रयास आरंभ कर अपने खतरनाक मंसूबों को कामयाब करने में लगें हैं कहने को विदेशी शक्तियों का भी सक्रिय योगदान है पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कोई देश कमजोर होता है छिपे बैठे गद्दारों से दुर्ग के द्वार अंदर से खोलने वाले और शत्रु को आमंत्रित करने वाले हमारे बीच के और अपने ही रहे हैं इतिहास साक्षी है अलक्षेन्द्र को रास्ता देने वाला तक्षशिला का राजा आम्भी था हमारे ऊपर अनेकों आक्रमणों के दौर चले हम तब तक सुरक्षित रहे जब तक हमारे शूर वीर पूर्वजों ने अपने अंतिम श्वास तक संघर्ष करते रहे उनके आत्मबलिदान के बाद ही परकीय विधर्मी पग पुण्य भूमि भारत पर पड़ सके हमें इस गौरवशाली इतिहास को स्मरण रखना और संजोए रखना होगा और आने वाली पीढ़ियों को हस्तांतरित कर एक संप्रदाय परंपरा स्थापित करनी होगी हमारा इतिहास हमारी प्रेरणा है हमारी आस्था हमारा विश्वास इस ज्योति पुंज को हमें जीवित रखना होगा हम रहें या न रहें परन्तु हमारा गौरव, अस्मिता, संघर्ष सदैव स्मरण रहे। *जय मां भारती*🚩🙏

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