भारत का इतिहास राजपूताना के इतिहास बिना अधूरा है एवं राजपूताना का इतिहआस मेवाड़ के इतिहास के बिना अधूरा है 1100 वर्षों का अदम्य शौर्य,पराक्रम,त्याग ,अप्रतिम बलिदान परंपरा जिसने 200 वर्षों तक परकीय मुस्लिम आक्रान्ताओं के कदम मातृभूमि भारत की धरती पर नहीं छूने दिए वह मेवर ही था राणा मोकल से ले कर एक शौर्य परंपरा की नीव रख मातृभूमि के सजग प्रहरी बन खड़ा रहा और शत्रु के दांत खट्टे करता रहा क्षत्रिय वीर साके करते वहीं क्षत्राणियाँ जौहर का वर्ण करती सका एवं जौहर से केसरिया बनता था और मातृभूमि के ऋण का उतार होता था विश्व के किस भाग मे ऐसी परंपरा जन्मी एवं आजीवन पालित हो एक अजस्र प्रेरणा बनी पाश्चात्य जगत में स्पार्टन स्पिरिट की बात होती है लियोनिदास जन्मे और मातृभूमि के raksharth ने मात्र 300 सैनिकों के साथ फारसी सेना का सामना किया था थर्मोपाइली जैसे सँकरे रास्ते को रोके रख कर जब तक एक भी सैनिक जीवित रहाऔर सफल रहे ये बलिदान और शौर्य का मानदंड मन गया पर प्रख्यात लेखक इतिहासकार कर्नल टॉड ने अपनी अनुपम कृति ऐनल्ज़ ऑफ राजस्थान में लिखा है राजपूताना की धरती पर असंख्य थर्मोपाइली एवं लियोनिदास मातृभूमि के रक्षा में वीर गति प्राप्त करते रहे अकबर को भी वैवाहिक संधियाँ करनी पड़ी थीं पर मेवर सदैव क्षात्र धर्म पर डट रहा अकबर स्वयं न जा मान सिंह को भेजा हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप के विरुद्ध यहाँ पर भी उसने राजपूत को राजपूत के विरुद्ध लड़वाने की कुटिल चाल चली हलदिगती के युद्ध मे मान सिंह महाराणा के भाले से बच गए परतू चेटक का एक पाँव कट गया झाला माँ ने स्वयं महाराणा का वेष धार कर महाराणा को चेटक पर आरूढ़ कर सुरक्षित हटा दिया हल्दीघाती का युद्ध एक अनिर्णीत युद्ध था मुग़लों की अंतिम निर्णायक पराजय दिवेर मे हुई ३२ सहस्र मुगल सैनिकों का आत्म समर्पण एक उल्लेखनीय घटना रही चाटुकार इतिहासकारों ने एक भ्रामक इतिहास प्रस्तुत किया और उससे अधिक सेक्यूलर इतिहास लेखन ने अपूर्णीय क्षति पहुंचाई आक्रान्ताओं का महिमा मंडन एवं सत्य इतिहास का लोप और असत्य को परोस सबसे प्रभावी विश्वासघात कर पीढ़ियों को अंधकार में धकेल दिया और उस अज्ञान से हम आज तक नहीं उबर सके एक प्रायोजित षड्यन्त्र रच भारत के गौरव ,शौर्य ,प्रतिरोध को नकार आक्रान्ताओं की विजय गाथा की विरुदावली कुछ निहित कुत्सित स्वार्थों के लिए इसराष्ट्र की तरुणाई को भ्रामक कूटरचित इतिहास को पड़ने पर मजबूर करती रही है आज राजपूताना एवं मेवाड़ का मातृभूमि के प्रति अचल निष्ठा एवं दायित्व कर्तव्य बोध ही भारत को भारत रख सका इस लेख की प्रेरणा आजकल कुछ मुस्लिम वोट बैंक के परजीवी इफ्तारवादियों के चंद वोटों के लिए अपनी भी बोली लगाने वाले कुछ स्वार्थी तत्वों के अनर्गल प्रलाप से ही उठी उन चंद मूर्खों को राजपूताना जा जीवन में एक बार पुण्य काम लेना चाहिए और वास्तविक इतिहास पढ़ कर तथ्य परक बात करने का प्रयास करना चाहिए बाबर को भारत पर आक्रमण का न्योता दौलत खान लोदी ने दिया था न की राणा संग ने इतिहास पढ़ लें अपने जैसों की सभा में वाहवाही लूट लेंगे लेकिन विद्वानों के बीच अपमानित तिरस्कृत होते रहेंगे यह तय है हमारे क्षत्रिय शूरवीरों का अपमान असहनीय है अतः हर स्तर पर इस अभद्र टिप्पणी का विरोध अनिवार्य है जिससे इस कुत्सित मनोवृत्ति वालों के मनोबल को तोड़ा जा सके की वे पुनः ऐसे शब्दों को बोलने,लिखने,प्रकट करने की हिम्मत न कर सकें जय माँ भारती
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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