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Showing posts from 2022

muse bharati 12

 हम सभी कट्टर शब्द लगाना अच्छा समझते हैं पर यह शब्द गलत संदेश देता है कट्टर अंधभक्ति है जो कहा लिखा सुना गया उसे ही मानना बाकी को अनसुना कर देना या न मानना तर्क की कोई जगह नहीं हम सनातनी निष्ठा या निष्ठ शब्द प्रयोग में लाएं हमारे यहां तो स्थापित दर्शन पर शास्त्रार्थ होते थे और सभी पक्ष सुने जाते थे हमने तो बौद्ध दर्शन के स्यादवाद और चार्वाक दर्शन को समान सम्मान दिया और भारतीय दर्शन माना सनातन वैचारिकी ही समावेशी है अन्य पंथ अनुयायीवेशी हैं और उनमें बाध्यता है आप के पूजा उपासना पद्धति पृथक हो सकते हैं पर लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति ज्ञान प्राप्ति अथवा मोक्ष ही है तो पूजा पद्धति से अनेक होते भी हम लक्ष्य से एक हो जाते हैं पंथ से भिन्न पर लक्ष्य से एक पंथ हमें भटका सकते हैं पर लक्ष्य हमें एक करता है विद्यायें भिन्न हो सकती हैं पर उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति है वेद भी कहते हैं एकंसद्विप्रा बहुधा वदन्ति ऐसी समावेशी सोच सनातन ही दे सकता है हमने इतिहास में भी सबको अपनाया इस्लाम की जेहादी तलवार का संबल बनती थी कुरान शरियत और दारुल इस्लाम का जुनून इस्लाम का इतिहास निर्दोषों के रक्त से रंजित है मंदिर...

muse bharati 11

 जो हमें पिछड़ा बताते हैं यह चित्र उनके लिए काफी है किसी भी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण मापदंड उसकी शैक्षिक व्यवस्था होती है क्योंकि वही समाज में संस्कार संस्कृति एवं सभ्यता का बीजारोपण करती है हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्यों ने ही सर्वप्रथम अलक्षेन्द्र (सिकन्दर) के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध किया था जो किसी भी परकीय आक्रांता का प्रथम आक्रमण था ३२६ ई पू और हमारा प्रथम स्वातंत्र्य समर था जिसका नेतृत्व वहीं के आचार्य चाणक्य ने किया था और जिनके द्वारा शिक्षित दीक्षित सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अलक्षेन्द्र की सेना का पराभव किया जिन्हें sandrocottos के नाम से यूनानी इतिहासकार भी वर्णित करते हैं अलक्षेन्द्र के आक्रमण से ऐसा कहा जाता है हमारा ऐतिहासिक काल प्रारंभ हुआ एवं पाश्चात्य जगत से संबंध बने परंतु इसमें संदेह उत्पन्न होता है अलक्षेन्द्र के आक्रमण का वर्णन यूनानी इतिहासकार और तुर्की इतिहासकार ही करते हैं तत्कालीन संस्कृत साहित्य में भी इसका वर्णन प्राप्त नहीं होता नंद वंश के धनानंद के निरंकुश शासन का समूलोच्चाटन कर राष्ट्र धर्म निभाने का आदर्श स्थापित किया ...

muse bharati 10

 आज साजिश रचते जो हैं उनको मौका देने वाले कौन कौन उनकी सहायता कर रहा है सांपों से तो निपट लेंगे पर आस्तीन के सांपों से अधिक खतरा है उनकी पहले व्यवस्था की जाए आज के लेख में जिस इकोसिस्टम की बात मैंने रखी है वह जड़ जमा चुकी है और वह विषवेल पनप कर फैल गई है आज आतंकवाद का नया अध्याय लिखने की तैयारी हो चुकी है अब आतंकवाद को जड़ से निर्मूल का समय हर पर है राष्ट्र हित में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों शक्तियों प्रवृत्तियों पर निर्णायक प्रभावी निर्णायक आघात करना ही होगा यदि राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है वंदे मातरम् https://www.facebook.com/100014631244258/posts/1329940227503673/?sfnsn=wiwspmo

muse bharati 9

 हर हर महादेव अयोध्या काशी मथुरा तो मात्र पड़ाव हैं हमारी निज वैभव निज गौरव को लौटाने के महाअभियान के हमारा लक्ष्य मातृभूमि भारत को परम वैभव विश्वगुरु अखंड हिंदु राष्ट्र भारत बनाना है जो स्वप्न हमने संजोया हमारे स्वातंत्र्य हुतात्माओं ने संजोया नाथूराम गोडसे का अस्थि कलश प्रतीक्षारत है जो स्वप्न युग दधीचि स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने संजोया नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे से प्रारंभ महातप उस सूर्योदय सुप्रभातम की प्रतीक्षा में सतत चरैवेति चरैवेति है जब वह लक्ष्य जिसे हर संघ स्थान पर हम नित्य भगवद्धवज के समक्ष प्रणिपात के समय अगणित स्वयंसेवक प्रण लेते आते हैं परम वैभवं नेतु मेतत स्वराष्ट्रं समर्था भवत्वाशिषा थे भृशम हमारी प्रार्थना उसी स्वर्णिम प्रभात में पूर्ण होगी जब हमारी आंखें अखंड हिंदु राष्ट्र भारत अकस‌ई चिन से कन्याकुमारी अराकान से काराकोरम तक एक भारत श्रेष्ठ भारत अखंड हिंदु राष्ट्र भारत के रूप में प्रतिष्ठित होगा और सभी भारतीय एकात्म एक स्वर से वंदे मातरम् के जयघोष से भारत माता को रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर उनके स्वर्णिम मंदिर में विराजमान कर लेंगे लक्ष्य न ओझल होने पाये कदम बढ़ा ...

muse bharati 8

 hinduism is a creed which teaches a person to be a patriot as a son of motherland vedas say mata bhumih putroham prithivyah earth is my mother and i am her son this mother son relation is expression of the concept of motherland matribhumi no son can be disloyal to his/her mother henceforth motherland a true hindu is agglomeration of all virtues inherited from our glorious lineage of illustrious vedic seers of whom we owe our ancestry our country derived is name hindusthan himalayam yad samarabhya yavadindu sarovaram tam devo nirmitam desham hindusthanam prachakshate starting from the mighty himalayas uptill the indian ocean the land made by the devas is hindusthan we are still bearing the blunderous superimposed greek nomenclature india uttaramyasyasamudrasscha himadrashchaiva dakshinam varsham tad bharatam nama bharati yatra santatih north of the sea south of himalayas the landmass betwixt is bharaharat its inhabitants are known as bharati when we have classical names why we are ...

muse bharati 7

 हमारे सभी मंदिरों पर सवाल उठाए जाते हैं क्या कभी यह भी सोचा है जिस समय हम विश्व के क‌ई स्थानों पर जिनका स्वरूप बदल दिया गया जो देश हमारे थे वहां हमारी संस्कृति थी क‌ई देश भारतीयों ने बसाये जहां आज भी हमारी संस्कृति की स्पष्ट छाप मिलती है वहां की भाषा पर छाप मिलती है यथा हिंदेशिया (इंडोनेशिया) वहां की राजधानी djkarta अथवा यज्ञकर्ता का अपभ्रंश है वहां की bahasa Indonesia bahasa संस्कृत का भाषा का अपभ्रंश है वहां की लोककला में रामायण की कथा का मंचन होता है राम वहां के लोकनायक हैं वहां की वायु सेवा गरुड़ के नाम पर है यह तो मात्र उदाहरण के लिए दे रहा हूं प्रमाण पर आ गया तो संपूर्ण विश्व में सनातन प्रभाव सिद्ध किया जा सकता है पूर्व इस्लामी काल में अर्वस्थान Arabia में भी वैदिक सनातन धर्म संस्कृति ही थी काबा का संगे अस्वद महामक्केश्वर ज्योतिर्लिंग है जो शुक्राचार्य को स्वयं भगवान शंकर के द्वारा दिया आत्मलिंग है जिस पर देवालय उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने निर्मित कराया था और वैदिक सनातन संस्कृति संस्कार धर्म से अज्ञान में डूबे अर्ववासियों को संस्कृत संस्कृति संस्कार दर्शन अध्यात्म सभ्...

muse bharati 6

 Hinduism is not a ism it's a perennial eternal source of divine culture inculcating all possible virtues of life leading to the path of righteousness and a socio-economic political general code of conduct a way of life as enunciated inte Vedas visualised and composed by our seers sanatan dharma and all in one term hindutva jai shri ram

muse bharati 5

 general initiative to rewrite history in the light of new findings which prove the cultural roots of Indian civilization passing into deep antiquity maybe to the dawn of civilization more-or-less to the creation itself it can be seen by the fact the longest time span is kalpa 4320000000 years still and thus our civilization and culture stands as the most deep rooted in beginning of time thus we must try to get out of the straitjacket of colonial historical time span thrust upon us procrastinating our story of historical and cultural growth to dwarf our pinnacles and glories to justify the British rule under the white man's burden and post independence copy paste of the colonial history was done mostly at least some fact hunt original research must have had to be pursued when we were on the verge of carving the educational future of a newly independent nation the leftist lobby meddling with the affairs distorted mal interpreted misinterpreted our glorious past reduced to a piteous...

muse bharati 4

 secular insular liberal leftist Lutyens इन सबका एक ही मकसद भारत तेरे टुकड़े होंगे भारत के टुकड़े करने के लिए तुम लोगों के विदेशी बाप लोग भी आते थे मदरसे में तो ईमान की पढ़ाई होती है इतिहास भूगोल विज्ञान से क्या मतलब पढ़ो तो जानो इंटरनेट पर भी अब प्रचुर मात्रा में जानकारी है लेकिन ढूंढोगे आतंकवाद के नुस्खे आतंक के आकाओं के विष वमन जिस देश में जन्म लिए अन्न पानी पाए उसी से गद्दारी खैर आज फिर इतिहास बता दें जिनका नाम और काम गिनाने में आगे रहते हो बाबर से आलमगीर वे कब अपनों के अपने हुए शाहजहां जब आलमगीर के द्वारा कैद कर लिया गया तब उसे यमुना का पानी भी बंद कर दिया तब उसने कहा था धन्य हैं वो हिन्दू जो अपने मरे बाप को भी पानी देते हैं भोजन में एक अनाज का हुक्म दिया तब उसके रसोइये ने चना कहा तो उसे चने के व्यंजन मिलते थे आलमगीर ने अपने भाई द्वारा शिकोह को हाथी तले मरवा दिया ये वही औरंगजेब था जिसे टोपी और क़ुरान की आयतों से अपना खर्च चलाने की बात से महिमा मंडित किया गया इसी औरंगजेब ने काशी मथुरा आदि असंख्य हिंदू मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट किया हिंदु नरसंहार रचे आज कश्मीर नस्लसंहार जेनोसाइड की...

muse bharati 3

 Macaulay started the work of demeaning the glorious history of bharat leftist historians Lutyens liberals press media is furthering the agenda what can they teach who are unknown to the glories of our nation culture tradition and heritage because who still look to the. west as their mentors blindly follow their views and dictates as religion take distorted history as a holy book there is a need to weed out these elements who are poisioning young minds with the trash knowledge inculcate d from leftist secular education system evolved by a young bo to n nation which was forced or infected with cultural amnesia and in forced unconsciousness injected with alienation towards nation history culture tradition and of course anti national feel and allured them to western mindset and leftist tendencies it's piteous to find educational career institutions who otherwise a purpose to groom a healthy mind for the future are being used by people with self vested interests who have no concern for...

muse bharati 2

 official record 60,000 temples destroyed is this also manipulation no country in the world was subjected to destruction sacrilege massacre forced conversions as bharat at the hands of islamic marauders mercenaries barbarians had they been after the wealth and splendour of bharat they would have just returned afer loot their main objective was jihad which is the driving force still justified and followed by radical islamic jehadists globally the destruction sacrilege of temples and conversion into mosques forced conversions hindu massacre all are living testimonials of this fact thi fact must be kept in mind the myth narrative created to depict invaders as benevolent lenient towards hindus and general acceptance of them as rulers cannot be accepted as right from the beginning 710c.e. to 1707c.e. king dahir to aurangzeb pockets of resistance continued to disrupt the mughal continual "suzerainty?"over whole bharat when were they at rest to rule may be in ncert books related to ...

Muse bharati 1

 history of India was created and lived enacted by heros and heroines in daredevil act of chivalry and sacrifice for the sake of nation dharma and sanskriti battlefields forts palaces resound still with their warcry chivalry and sacrifice col. Todd in his Annals of Rajasthan has himself said that there were many a thermopylae and Leonidas in the sands of Rajasthan the west can boast only single many laid down their lives performing the supreme duty of serving and saving the nation Our history is not based on myth heresay it was recorded later as it was lived in our folklore and literature they can prove a reservoir of unknown facts and realities unrevealed left untouched or left in oblivion our history was not creation of bards court poets courtiers employing mythical instruments to give an epic effect our history lives in living testimonials haldighati chittorgarh and countless devastated ruined once kingdoms forts fortresses and as memories of countless unsung heros and womenfolk...

राष्ट्र चेतना ११

 जब राष्ट्र धर्म संस्कृति संकट में हो तब व्यास पीठ से राष्ट्र धर्म का उपदेश ही भाये वंदे मातरम् वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिता: शास्त्र की रक्षा शस्त्र से शास्त्र है सिखाते हैं राष्ट्र धर्म संस्कृति की रक्षा हेतु शस्त्र धारण एवं राष्ट्र धर्म राष्ट्र निष्ठा जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी जय मां भारती

राष्ट्र चेतना १०

 भारत एक अलौकिक क्षमताओं वाला देश है पर हमारे देश को कुछ ऐसे लोगों ने पनपने न दिया उसी का उल्लेख आज करता हूं हमारे इतिहास को पराभव का इतिहास बना दिया गया गौरवशाली इतिहास को अंधकार में धकेल दिया गया आक्रांताओं का इतिहास महिमा मंडित कर विशेष स्थान पा गया आततायी मुगल बाबर से आलमगीर तक सब सम्मानित हो ग‌ए और जो सम्मान के अधिकारी हमारे शूर वीर वीरांगनायें वे या तो गायब कर दी गई या महत्वहीन कर दी ग‌ईं अकबर औरंगजेब महान हो ग‌ए हम यह भूल जाते हैं ६०,०००मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट किया गया जजिया जैसे कर लगाये ग‌ए हिंदू नरसंहार जबरन धर्मांतरण अत्याचार अनाचार के दौर चले इस पर भी मुगल महान थे आज देश का एक बड़ा वर्ग मुस्लिम समाज जो आज तक अपने को राष्ट्रीय मुख्यधारा से अपने को जोड़ नहीं पाया आज भी अपने को उनका वंशज कहने में गौरव अनुभव करता है हमारे वीर जिन्होंने अपनी मातृभूमि के रक्षार्थ अपने प्राण न्यौछावर कर दिए वीरांगनाओं ने जौहर का वरण किया वे हमारे लिए बेमानी हो ग‌ए या गुमनामी में धकेल दिए गए ऐसा एकाएक नहीं हुआ स्वातंत्र्योत्तर भारत में हमारे प्रथम शिक्षा मंत्री एक विदेशी मौ आजाद ने एक ऐसी शैक्षि...

राष्ट्र चेतना ९

 शिक्षा एवं शिक्षण के अरणी मंथन के द्वारा गुरु अपने शिष्य के अंतस रूपी यज्ञ कुंड में ज्ञान यज्ञ हेतु विद्या रूपी ज्ञान अग्नि का प्रज्वलन करता है अग्नि जैसे समस्त अवांछित हानिप्रद तत्वों का निर्मूलन कर बुद्धि विवेक व्यक्ति को परिमार्जित एवं पवित्र कर विद्याध्ययन हेतु उपयुक्त बनाती है वैसे ही दैनंदिन जीवन में भी हम देखते हैं कि दैनिक उपयोग की वस्तुएं खाद्य सामग्री का भी हम प्रक्षालन धावन शोधन कर ही प्रयोग में लाते हैं ज्ञान केवल बोध मात्र तक सीमित नहीं है उसे ज्ञान विज्ञान दर्शन अध्यात्म तक ऊर्ध्व गामी पर पर अग्रसर करना भी गुरु एवं शिष्य दोनों का समान दायित्व है आज कल शिक्षा मात्र बोध ज्ञान उपाधि नौकरी परिवार तक ही सीमित हो कर रह गई है आज जो विसंगतियों का अंबार हमें दिखाई देता है वह स्वाध्याय चिंतन मनन की ओर परांडमुख होने के कारण है हम शिक्षित हो उदर पूर्ति हेतु तो तैयार हो जाते हैं पर क्या हम ऋणों देव ऋण गुरु ऋण पितृ ऋण एवं राष्ट्र ऋण या धर्म ऋण के लिए तैयार हो पाते हैं मनुष्य जन्म एक महद्युद्देष्य हेतु है हमें नर से नारायण स्वार्थ से निस्वार्थ अर्थ से परमार्थ ज्ञान से विज्ञान व्यष्...

राष्ट्र चेतना ८

 भारत का गौरव त्याग है वृत्रासुर को मारने के लिए अस्त्र-शस्त्र निर्माण के लिए ऋषि दधीचि के अस्थि दान से महाराज हरिश्चन्द्र शिबि रन्तिदेव सभी ने दान किया महादानी कर्ण ने युद्ध भूमि में अपने सोने के दांत को बात से गंगा प्रकट कर धो कर दान किया महाराज हर्षवर्धन भी दान के लिए ही प्रतिश्रुत हैं भगवान श्रीराम ने पिता के वचन के अनुपालन में राज्य का दान किया दान एवं त्याग बहुत ऊंचे आदर्श हैं वैदिक याज्ञनिक परंपरा में यज्ञ कुंड में आहुति का मंत्र इदम अमुक देवाय इदन्न मम अर्थात यह आहुति मैं अमुक देवी-देवता को दे रहा हूं यह मेरा नहीं मेरा नहीं इंगित करता है कि मनुष्य का कुछ नहीं वह जब तक नश्वर शरीर के साथ नश्वर संसार में है वह उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग उपभोग करता है उपभोक्ता consumer है स्वामी owner नहीं ‌यह हमारे भारतीय दर्शन के उच्चतम स्तर पर ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या के ही अनुरूप है जो हमें निरासक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है दान त्याग हमें निरासक्त बनाते हैं इसीलिए हमारे यहां के सम्राट अपवाद छोड़ कर सभी त्याग और दान की प्रतिमूर्ति राजर्षि रहे यथा विदेह राज जनक आदि यह तो रही महापुरुषों की बात ...

राष्ट्र चेतना ७

 भारत का इतिहास वीरों ने अपने रक्त से लिखा भारत का कोई भी कोना अछूता नहीं रहा वीरों के साकों और वीरांगनाओं के जौहर की ज्वाला से मातृशक्ति पल पल कभी लक्ष्मीबाई दुर्गावती चेनम्मा बन आक्रांताओं के दांत खट्टे करती रही कभी जीजाबाई बन शिवा से नृसिंह तैयार कर रण में भेजती रही यह भारत की जीवनी शक्ति थी जिसने पराभव कभी स्वीकार नहीं किया प्राण न्यौछावर किए पर धर्म संस्कृति न दिया राजा दाहिर से लेकर राणा राज सिंह तक कभी तथाकथित आक्रांताओं को निष्कंटक शासन ने करने दिया आक्रांताओं ने अत्याचार एवं विध्वंस के दौर चलाए पर आज भी हमारा राष्ट्र धर्म संस्कृति विद्यमान है उन अगणित बलिदानों से जौहर की राखों से हमारे तीर्थ यात्रा में हमें उन रण क्षेत्र एवं जौहर स्थलों को भी सम्मिलित करना चाहिए जहां पर हमारे आज की रचना की कथा हमारे पूर्वजों ने अपने बलिदान से लिखी धन्य है भारत जिसका निर्माण त्याग बलिदान और शौर्य से हुआ। वंदे मातरम् जय हिंदुत्व जय हिंदु राष्ट्र भारत

राष्ट्र चेतना ६

 ऐसे तो ज्ञान विज्ञान दर्शन जिज्ञासा शोध अनुसंधान शिक्षा आदि सारी विधायें अर्थहीन हैं उनमें आगे बढ़ना ही नहीं चाहिए परन्तु जिज्ञासा कौतूहल ज्ञान पिपासा के साथ ही हमारा जन्म होता है सूर्य के प्रथम दर्शन से ज्ञान हमें सौर मंडल तक ले गया विज्ञान हमें अंतरिक्ष तक ले गया उपग्रह हमें सूर्य के पास पहुंचा दिया बालपन के चंदा मामा को जानने की जिज्ञासा हमें चंँद्र यान को चंद्र भूमि पर उतरने को मजबूर कर दी जानने की इच्छा ज्ञान जान लेने तक विज्ञान क्या क्यों कैसे दर्शन मैं कौन कोहं से सोहं जब हर क्षेत्र में जिज्ञासा प्रधान है तब राष्ट्र धर्म संस्कृति में इतिहास भूगोल संस्कृति संस्कार स्वाभिमान का भी महत्व है हर व्यक्ति को अपनी जड़ों को जानने का अधिकार है क्योंकि इतिहास हमारी चिरन्तनता एवं प्राचीनता का आधिकारिक अभिलेख है इतिहास लिखा बाद में जाता है गढ़ा पहले जाता है इतिहास हम भूल सकते हैं पर उसे गढ़ने वाले को कोई कृतघ्न देश ही भूल सकता है एक कृतज्ञ राष्ट्र कदापि नहीं क्यों कि वह कभी इस सत्य को नहीं भूलेगा कि आज उसका और उसके राष्ट्र का अस्तित्व उन इतिहास गढ़ने वाले शलाका पुरुषों के चलते है अब जब ...

राष्ट्र चेतना ५

 देशभक्ति देश के प्रति आदर कोई भी कर सकता है देश एक भूआकृति या भूखंड के प्रति आदर भाव होता है राष्ट्र देश को एक भूकृति न मान कर एक जीवंत स्वरूप मान कर उसके प्रति एकनिष्ठ आस्था एवं समर्पण का भाव है सम्मान या आदर से ऊपर उठकर पूजा एवं आस्था का भाव है देशभक्ति किसी में भी हो सकती है पर राष्ट्र भक्ति बिरले विलक्षण सोच में होती है हम मां भारती एवं अखंड हिंदु राष्ट्र भारत में आस्था रखते हैं और मातृवत पूजा करते हैं पूजा संस्कार प्रेरित होती है एकनिष्ठ भाव होता है एवं समर्पण अतः देश से अधिक श्रेयस्कर राष्ट्र शब्द उचित प्रतीत होता है राष्ट्र से अखंड हिंदु राष्ट्र भारत का चित्र समक्ष प्रस्तुत हो जाता है भारत माता के उच्चारण मात्र से कमलासना मां भारती का दिव्य दर्शन मानस में अंकित हो जाता है भूमि अनेक हो सकती हैं परंतु मातृभूमि अथवा कहीं कहीं पितृभूमि भी कहते हैं एक ही होती है land can be many or any but motherland/fatherland is only one वंदे मातरम् 🇮🇳🌈 राष्ट्रीय तो हैं ही राष्ट्रत्व जगायें जय हिंदुत्व जय श्री राम

राष्ट्र चेतना ४

 राष्ट्र एक संकल्पना नहीं हमारे ऋग्वेद के पृथ्वी सूक्त "माता भूमि:पुत्रोहम पृथिव्या:"का मूर्तिवंत जीवंत स्वरूप है जो महर्षि अरविन्द ऋषि बंकिम चन्द्र युग दधीचि क्रांतिपथिक स्वातंत्र्य सूर्य सावरकर क्रांतिशूरवीर भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद खुदीराम बोस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस स्वामी विवेकानंद आदि ने दर्शन मनन चिन्तन से अनुप्राणित हो राष्ट्र वंदन की अजस्र परंपरा की नींव रखी जिससे आज भी अनुप्राणित हो हम एक नव्य एकात्म अखंड भारत हिंदु राष्ट्र भारत की ओर निरंतर अग्रसर हैं। 

राष्ट्र चेतना ३

 शूरवीरों ने इतिहास रचा सीमाएं भारत की रचने को पर कभी न रक्तरंजित किया खड्ग जीता संस्कृति संस्कारों से आज भी गाथाएं   गाती हैं शौर्य अशोक महान के पर आज न भूलो वीरों इतिहास रचे नहीं जाते कोरे रक्तरंजित साम्राज्य विस्तार से कालजयी इतिहास रचे हैं  सनातन संस्कृति के विस्तार ने कृणवंतो विश्वमार्यम आज गूंज रहा अखिल विश्व विस्तार में धर्म सनातन का डंका बज रहा आज फिर भारत शक्ति उत्कर्ष पर। वंदे मातरम् जय हिंदुत्व जय अखंड हिंदु राष्ट्र भारत 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

राष्ट्र चेतना २

 भारत का पराभव थोपा गया और विरासत वैभव शौर्य छिपाया भुलवाया गया इस शिक्षा पद्धति से अच्छे कर्नल टॉड थे जिन्होंने एनल्स आफ राजस्थान में क्षत्रिय शौर्य प्रशस्ति हेतु देश निकाला स्वीकार किया और हम एक झूठे मनगढ़ंत दरबारी इतिहास को पढ़ने को मजबूर किए गए यह भारतीय अतीत एवं संस्कृति पर लुटियंस एवं राजनीतिक कुचेष्टा का आत्मघात है इसका प्रतिकार परिष्कार अति आवश्यक है और नहीं तो पीढ़ियां गुमराह होती जाएंगी और हम दोषी होंगे विश्वासघात के कि अवसर पा कर भी हम बदलाव नहीं ला सके इतिहास का पुनर्लेखन सामयिक आवश्यकता है राष्ट्र हित में। जय श्री राम

राष्ट्र चेतना १

 दुनिया कहती है हम पीछे हैं किस चीज में दुनिया २०२२ हम भारतीय वि २०७९ युग ५१२४ आगे जायेंगे तो चकरा जाओगे भ‌इया कल्पों में अगर जायेंगे सबसे लंबी काल गणना का विश्व कीर्तिमान गिनेस बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में कल्प के ही नाम है चतुर्युग मन्वन्तर कल्प कितने बीत चुके हम तब भी थे हैं एवं आगे भी रहेंगे भौतिकता में आगे होगे तुम भोगवादी हो हम अध्यात्म प्रधान योगवादी हैं हमने जीवन त्याग से जिया तुमने संग्रह और तृष्णा में जिया हमने मृत्यु को अमरत्व माना तुमने मृत्यु को अंत हमने निराशा में भी आशा ढूंढ़ी तुम निराशा में भटकते रहे तुम युद्ध ईर्ष्या द्वेश में पलना सीखें हम शांति समत्व सामंजस्य सद्भाव में पले तुम एक ग्रंथ के अनुसार चले हम वैदिक वांग्मय एवं अगणित ग्रंथों के अनुसार चले तुम सब मेरा और हम सब हमारे वसुधैव कुटुंबकम् पर चले तुम भोगवादी हम योगवादी आपके ही यहां किसी ने सही लिखा है east is east west is west never the twain shall meet हमारे बराबर आ सकते हो भ‍इया पर आगे तो सनातन के रूप में हमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने वरदानित किया है वह से वेद वेद से विज्ञान वेद से ही विचार जाने हुए पर तुम्हारा ...