राष्ट्र चेतना ७
भारत का इतिहास वीरों ने अपने रक्त से लिखा भारत का कोई भी कोना अछूता नहीं रहा वीरों के साकों और वीरांगनाओं के जौहर की ज्वाला से मातृशक्ति पल पल कभी लक्ष्मीबाई दुर्गावती चेनम्मा बन आक्रांताओं के दांत खट्टे करती रही कभी जीजाबाई बन शिवा से नृसिंह तैयार कर रण में भेजती रही यह भारत की जीवनी शक्ति थी जिसने पराभव कभी स्वीकार नहीं किया प्राण न्यौछावर किए पर धर्म संस्कृति न दिया राजा दाहिर से लेकर राणा राज सिंह तक कभी तथाकथित आक्रांताओं को निष्कंटक शासन ने करने दिया आक्रांताओं ने अत्याचार एवं विध्वंस के दौर चलाए पर आज भी हमारा राष्ट्र धर्म संस्कृति विद्यमान है उन अगणित बलिदानों से जौहर की राखों से हमारे तीर्थ यात्रा में हमें उन रण क्षेत्र एवं जौहर स्थलों को भी सम्मिलित करना चाहिए जहां पर हमारे आज की रचना की कथा हमारे पूर्वजों ने अपने बलिदान से लिखी धन्य है भारत जिसका निर्माण त्याग बलिदान और शौर्य से हुआ। वंदे मातरम् जय हिंदुत्व जय हिंदु राष्ट्र भारत
Comments
Post a Comment