muse bharati 7

 हमारे सभी मंदिरों पर सवाल उठाए जाते हैं क्या कभी यह भी सोचा है जिस समय हम विश्व के क‌ई स्थानों पर जिनका स्वरूप बदल दिया गया जो देश हमारे थे वहां हमारी संस्कृति थी क‌ई देश भारतीयों ने बसाये जहां आज भी हमारी संस्कृति की स्पष्ट छाप मिलती है वहां की भाषा पर छाप मिलती है यथा हिंदेशिया (इंडोनेशिया) वहां की राजधानी djkarta अथवा यज्ञकर्ता का अपभ्रंश है वहां की bahasa Indonesia bahasa संस्कृत का भाषा का अपभ्रंश है वहां की लोककला में रामायण की कथा का मंचन होता है राम वहां के लोकनायक हैं वहां की वायु सेवा गरुड़ के नाम पर है यह तो मात्र उदाहरण के लिए दे रहा हूं प्रमाण पर आ गया तो संपूर्ण विश्व में सनातन प्रभाव सिद्ध किया जा सकता है पूर्व इस्लामी काल में अर्वस्थान Arabia में भी वैदिक सनातन धर्म संस्कृति ही थी काबा का संगे अस्वद महामक्केश्वर ज्योतिर्लिंग है जो शुक्राचार्य को स्वयं भगवान शंकर के द्वारा दिया आत्मलिंग है जिस पर देवालय उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने निर्मित कराया था और वैदिक सनातन संस्कृति संस्कार धर्म से अज्ञान में डूबे अर्ववासियों को संस्कृत संस्कृति संस्कार दर्शन अध्यात्म सभ्यता ज्ञान विज्ञान का आलोक दिया था जो मक्का में काबा के अंदर जिरहम बिनतोई के स्वर्ण पात्र पर उत्कीर्ण विक्रम प्रशस्ति के रूप में आज भी विद्यमान है वामन अवतार में तीन पग गया मक्का और शुक्ल तीर्थ ही धरे गए आज भी हरम शब्द हरिम का ही अपभ्रंश है और विष्णु पद आज भी है कूप जिसे आबे जम जम कहते हैं वही गंगा है क्योंकि शिव गंगा धर हैं नंदी एवं गंगा के बिना शिव की कल्पना ही नहीं की जा सकती मकाम ए इब्राहिम ही ब्रह्म कमल है पैगंबर मोहम्मद स्वयं कुरैशी थे जिनके आराध्य महामक्केश्वर थे एवं हुबल अल लाट अल उज्जा अल मनात संग ३६० देवी देवताओं की पूजा होती थी और काबा के देवालय के कर्ताधर्ता भी उन्हीं का कबीला था मोहम्मद के चाचा उमर बिन हाशमी ने भगवान शंकर पर एक रचना भी रची ऐसे तथ्य हैं जो सनातन संस्कृति धर्म का प्रचलन इस्लाम पूर्व अरब में सिद्ध करते हैं वैसे भी सामान्य तथ्य है इस्लाम का परचम लहराने और काफिरों के विरुद्ध छेड़े इस्लामी जिहाद ने ही विध्वंस जबरन धर्मांतरण नरसंहार के दौरों ने ही प्रभावी रूप से सनातन संस्कृति के केंद्र देश पर अस्तित्व घातक प्रहार किया और उनका स्वरूप परिवर्तन किया आज हम से पूछा जाता है हम कौन जवाब है तुम जब नहीं थे उसके भी पहले सृष्टि के साथ हम थे मनु की सन्तान पृथु की परंपरा भरत के वंशज और वैदिक सनातन संस्कृति संस्कार में पर बढ़े भारत के भारत के भारती आसिंधो सिंधु परयंता यस्य भारत भूमिका पुनः छीने वैभव और अपमान चिह्न मिटा अपने स्वाभिमान के लिए प्रयासरत विजय रथ ब‌ढ़ चला है आइए स्वागत कर संग हो लें यह भारत और हर भारतीय के स्वाभिमान को पुनर्जीवित पुनर्स्थापित करने का अभियान है हमें गर्व है इस महायज्ञ में आहुति बनने का अवसर प्राप्त हो रहा है वंदे मातरम् जय हिंदुत्व जय हिंदु राष्ट्र भारत जय श्री राम 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

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