muse bharati 9
हर हर महादेव अयोध्या काशी मथुरा तो मात्र पड़ाव हैं हमारी निज वैभव निज गौरव को लौटाने के महाअभियान के हमारा लक्ष्य मातृभूमि भारत को परम वैभव विश्वगुरु अखंड हिंदु राष्ट्र भारत बनाना है जो स्वप्न हमने संजोया हमारे स्वातंत्र्य हुतात्माओं ने संजोया नाथूराम गोडसे का अस्थि कलश प्रतीक्षारत है जो स्वप्न युग दधीचि स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने संजोया नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे से प्रारंभ महातप उस सूर्योदय सुप्रभातम की प्रतीक्षा में सतत चरैवेति चरैवेति है जब वह लक्ष्य जिसे हर संघ स्थान पर हम नित्य भगवद्धवज के समक्ष प्रणिपात के समय अगणित स्वयंसेवक प्रण लेते आते हैं परम वैभवं नेतु मेतत स्वराष्ट्रं समर्था भवत्वाशिषा थे भृशम हमारी प्रार्थना उसी स्वर्णिम प्रभात में पूर्ण होगी जब हमारी आंखें अखंड हिंदु राष्ट्र भारत अकसई चिन से कन्याकुमारी अराकान से काराकोरम तक एक भारत श्रेष्ठ भारत अखंड हिंदु राष्ट्र भारत के रूप में प्रतिष्ठित होगा और सभी भारतीय एकात्म एक स्वर से वंदे मातरम् के जयघोष से भारत माता को रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर उनके स्वर्णिम मंदिर में विराजमान कर लेंगे लक्ष्य न ओझल होने पाये कदम बढ़ा कर चल मंजिल तेरे पग चूमेगी आज नहीं तो कल "चिर सजग आंखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना जाग तुझको दूर जाना the woods are lovely dark and deep but I have promises to keep and miles to go before I sleep excelsior excelsior वंदे मातरम् 🚩🌈☀️🙏
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