muse bharati 11
जो हमें पिछड़ा बताते हैं यह चित्र उनके लिए काफी है किसी भी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण मापदंड उसकी शैक्षिक व्यवस्था होती है क्योंकि वही समाज में संस्कार संस्कृति एवं सभ्यता का बीजारोपण करती है हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्यों ने ही सर्वप्रथम अलक्षेन्द्र (सिकन्दर) के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध किया था जो किसी भी परकीय आक्रांता का प्रथम आक्रमण था ३२६ ई पू और हमारा प्रथम स्वातंत्र्य समर था जिसका नेतृत्व वहीं के आचार्य चाणक्य ने किया था और जिनके द्वारा शिक्षित दीक्षित सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अलक्षेन्द्र की सेना का पराभव किया जिन्हें sandrocottos के नाम से यूनानी इतिहासकार भी वर्णित करते हैं अलक्षेन्द्र के आक्रमण से ऐसा कहा जाता है हमारा ऐतिहासिक काल प्रारंभ हुआ एवं पाश्चात्य जगत से संबंध बने परंतु इसमें संदेह उत्पन्न होता है अलक्षेन्द्र के आक्रमण का वर्णन यूनानी इतिहासकार और तुर्की इतिहासकार ही करते हैं तत्कालीन संस्कृत साहित्य में भी इसका वर्णन प्राप्त नहीं होता नंद वंश के धनानंद के निरंकुश शासन का समूलोच्चाटन कर राष्ट्र धर्म निभाने का आदर्श स्थापित किया समस्त भारत को जो गणों में विभक्त था सभी गणों को एक सूत्र में बांध अखंड भारत के संकल्प को साकार किया जैसा सरदार साहब ने ५६२रियासतों को एक सूत्र कर भारत को अखंड किया यह अखंड भारत कुछ सत्ता लोलुप राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले लोगों के द्वारा कूटरचित षड्यंत्रों का ग्रास बन संकुचित होता रहा आज हमें कहा जाता है कि हम पूर्वजीवी nostalgic chauvinist कहा जाता है ऐसा क्यों न हो हम राष्ट्र को राष्ट्र देव मानते हैं राष्ट्र हमारे लिए एक कोरी भूकृतिlandform या भौगोलिक भूभाग geographic part नहीं है इसलिए हमें क्षुब्ध क्रुद्ध होना स्वाभाविक है क्योंकि हम वंदे मातरम् आनंद मठ ऋषि बंकिमचंद्र के भारत मां जिन्हें उन्होंने स्वयं त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कहा है उस परंपरा को मानने वाले हैं भारत पर आक्रमण भारत माता राष्ट्र धर्म संस्कृति संस्कार स्वाभिमान हिंदुत्व पर आघात है उसे हम सहन न करेंगे जिन लुट्यंस वामपंथी डिजाइनर मीडिया अर्बन नक्सल जेहादी आदि राष्ट्र विरोधी तत्वों को भारत एक भूमि लगती है उन पर कोई अंतर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे भारत को एक षड्यंत्रों कुचक्रों दुरभिसंधियों की प्रयोगशाला मान भारत को घात लगाए आघात कर विनष्ट करने का स्वप्न पाले बैठे हैं और यह इस राष्ट्र की महानता है कि सब जानते समझते हुए हम आज भी ऐसे आस्तीन के सांपों को पाले बैठे हैं जो प्रवृत्ति वश दंश करने एवं विष वमन करने से बाज नहीं आने वाले क्यों कि जो राष्ट्र धर्म संस्कृति संस्कार से विद्वेष दुर्भाव रखते हैं उनमें संस्कार आ ही नहीं सकते संस्कार माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्या एवं सप्त कोटि कंठ कल कल निनाद कराले द्वि सप्त भुजै धृत करवाले के बोले मां तुमि अबले के महामंत्र से अनुप्राणित हम लोग जो राष्ट्र देव को आराध्य मानते हैं और भारत में भारत माता की छवि साकार देखते हैं उन्हें क्षोभ क्रोध स्वाभाविक है जब हम अपने इतिहास को ईस्वी के खोल में बैठाने की कुचेष्टा हमारे गौरवशाली अतीत को पराभव का इतिहास बना देखते हैं वामपंथी तंत्र के द्वारा इतिहास संस्कृति के विद्रूपण बर्बर आक्रांताओं का महिमा मंडन स्मरण करते हैं तो क्षोभ क्रोध स्वाभाविक है महाराज पृथु से पृथ्वी का इतिहास महाराज मनु से मानव इतिहास सम्राट भरत से भारत का इतिहास आसिंधो सिंधु परयंता यस्य भारत को योजनों विस्तृत विशाल भूखंड एक महाराष्ट्र भारत को वर्ग मीटर में संकुचित देखते हैं विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति काल गणना कल्प प्राक्विज्ञान प्राक्ज्ञान प्राक्दर्शन प्राक्शिक्षा संस्कृति की जन्मभूमि भारत के साथ जानबूझकर ऐसा भद्दा अपमान उपहास कुछ स्वार्थी तत्वों के द्वारा अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा एवं स्वार्थ साधन का कन्दुक बनता देख क्षोभ क्रोध स्वाभाविक है हम भारत के गत वैभव को लौटा कर ही लायेंगे और आसिंधो सिंधु परयंता यस्य भारत अखंड हिंदु राष्ट्र भारत का चित्र संजोए स्वप्न को साकार कर कर ही रहेंगे हो सकता है मैं कल उस दिन का साक्षी न बन सकूं काल कवलित हो चुका हूंगा पर यह संतोष रहेगा कि अखंड हिंदु राष्ट्र भारत राष्ट्र धर्म राष्ट्र विरोधी शक्तियों राष्ट्र धर्म संस्कृति संस्कार स्वाभिमान हिंदुत्व के लिए नींव का पत्थर एवं स्वर बन सका तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें वंदे मातरम् जय हिंदुत्व जय अखंड हिंदु राष्ट्र भारत 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🙏👍🌈👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣✌️
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