राष्ट्र चेतना ६
ऐसे तो ज्ञान विज्ञान दर्शन जिज्ञासा शोध अनुसंधान शिक्षा आदि सारी विधायें अर्थहीन हैं उनमें आगे बढ़ना ही नहीं चाहिए परन्तु जिज्ञासा कौतूहल ज्ञान पिपासा के साथ ही हमारा जन्म होता है सूर्य के प्रथम दर्शन से ज्ञान हमें सौर मंडल तक ले गया विज्ञान हमें अंतरिक्ष तक ले गया उपग्रह हमें सूर्य के पास पहुंचा दिया बालपन के चंदा मामा को जानने की जिज्ञासा हमें चंँद्र यान को चंद्र भूमि पर उतरने को मजबूर कर दी जानने की इच्छा ज्ञान जान लेने तक विज्ञान क्या क्यों कैसे दर्शन मैं कौन कोहं से सोहं जब हर क्षेत्र में जिज्ञासा प्रधान है तब राष्ट्र धर्म संस्कृति में इतिहास भूगोल संस्कृति संस्कार स्वाभिमान का भी महत्व है हर व्यक्ति को अपनी जड़ों को जानने का अधिकार है क्योंकि इतिहास हमारी चिरन्तनता एवं प्राचीनता का आधिकारिक अभिलेख है इतिहास लिखा बाद में जाता है गढ़ा पहले जाता है इतिहास हम भूल सकते हैं पर उसे गढ़ने वाले को कोई कृतघ्न देश ही भूल सकता है एक कृतज्ञ राष्ट्र कदापि नहीं क्यों कि वह कभी इस सत्य को नहीं भूलेगा कि आज उसका और उसके राष्ट्र का अस्तित्व उन इतिहास गढ़ने वाले शलाका पुरुषों के चलते है अब जब हम देख रहे हैं कि हमारे इतिहास स्वाभिमान गौरव वर्चस्व को विद्रूप कर बनावटी इतिहास रचा गया जब हम जानते हैं इस्लामी जिहाद का सबसे खूनी खौफनाक असहिष्णु विध्वंसक दौर भारत ने झेला आज अपने मंदिरों के भग्नावशेष खंडित प्रतिमायें जो ज़मींदोज़ कर दी गईं जाहिर सी बात है खुदाई कर ही तो जमीन के नीचे क्या है उसका पता चलेगा ज्ञान वापी में तो तहखाने की बात है ताला खोल उसे देख लिया जाए खुदाई तो हर जगह करनी पड़ेगी क्योंकि विखंडित प्रतिमाओं के खंड स्तंभ प्रतीक आदि कालांतर में जमीन के नीचे ही दब गये होंगे हर स्वाभिमानी राष्ट्रीय को अपने अतीत को जानने का अधिकार है और अगर अवसर मिले तो इतिहास के कलंक मिटा अपनी भूल सुधारने का भी उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार है बर्लिन की दीवार एक कलंक के रूप में मानी समझी गई तोड़ दी गई और दो राष्ट्र एकात्म हो एक राष्ट्र पुनः हो गए जो भी चीज अतीत की खड़ी की हूई अपमान चिह्न हो राष्ट्रीय स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली हो उसे हटा अपने सम्मान स्वाभिमान आत्मसम्मान अस्मिता गौरव की पुनर्स्थापना करना हमारा कर्तव्य है यही राष्ट्र धर्म युग धर्म भी है। वंदे मातरम् जय हिंदुत्व जय हिंदु राष्ट्र भारत 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🙏
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