राष्ट्र चेतना ४
राष्ट्र एक संकल्पना नहीं हमारे ऋग्वेद के पृथ्वी सूक्त "माता भूमि:पुत्रोहम पृथिव्या:"का मूर्तिवंत जीवंत स्वरूप है जो महर्षि अरविन्द ऋषि बंकिम चन्द्र युग दधीचि क्रांतिपथिक स्वातंत्र्य सूर्य सावरकर क्रांतिशूरवीर भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद खुदीराम बोस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस स्वामी विवेकानंद आदि ने दर्शन मनन चिन्तन से अनुप्राणित हो राष्ट्र वंदन की अजस्र परंपरा की नींव रखी जिससे आज भी अनुप्राणित हो हम एक नव्य एकात्म अखंड भारत हिंदु राष्ट्र भारत की ओर निरंतर अग्रसर हैं।
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