muse bharati 12
हम सभी कट्टर शब्द लगाना अच्छा समझते हैं पर यह शब्द गलत संदेश देता है कट्टर अंधभक्ति है जो कहा लिखा सुना गया उसे ही मानना बाकी को अनसुना कर देना या न मानना तर्क की कोई जगह नहीं हम सनातनी निष्ठा या निष्ठ शब्द प्रयोग में लाएं हमारे यहां तो स्थापित दर्शन पर शास्त्रार्थ होते थे और सभी पक्ष सुने जाते थे हमने तो बौद्ध दर्शन के स्यादवाद और चार्वाक दर्शन को समान सम्मान दिया और भारतीय दर्शन माना सनातन वैचारिकी ही समावेशी है अन्य पंथ अनुयायीवेशी हैं और उनमें बाध्यता है आप के पूजा उपासना पद्धति पृथक हो सकते हैं पर लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति ज्ञान प्राप्ति अथवा मोक्ष ही है तो पूजा पद्धति से अनेक होते भी हम लक्ष्य से एक हो जाते हैं पंथ से भिन्न पर लक्ष्य से एक पंथ हमें भटका सकते हैं पर लक्ष्य हमें एक करता है विद्यायें भिन्न हो सकती हैं पर उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति है वेद भी कहते हैं एकंसद्विप्रा बहुधा वदन्ति ऐसी समावेशी सोच सनातन ही दे सकता है हमने इतिहास में भी सबको अपनाया इस्लाम की जेहादी तलवार का संबल बनती थी कुरान शरियत और दारुल इस्लाम का जुनून इस्लाम का इतिहास निर्दोषों के रक्त से रंजित है मंदिर...