अखंड भारत: संकल्प से सिद्धि
भारत ही वह मूल है जिससे हम भारतीय हैं परंतु किसी भी राष्ट्र के मौलिक सनातन दैव प्रदत्त भूकृति प्राकृतिक स्वरूप को ही हम सनातन राष्ट्र की मान्यता दे सकते हैं भारत का मौलिक स्वरूप आसिंधु सिंधु पर्यंत यस्य भारत भूमिका मातृभू पुण्य भूश्चैव हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् स्मृत: ही रहा है और हम उस शाश्वत सत्य को ही सत्य मानते हैं विखंडित इंडिया एक मानवकृत अपमान और एक राजनीतिक कूटनीतिक छल प्रपंच पाषंड दुष्ट नीति का परिणाम है और एक अध्यास है जो भारत के अखंड स्वरूप को विखंडित विद्रूप करने का दुष्परिणाम है खंडित मूर्ति की पूजा नहीं होती परंतु शिव लिंग की पूजा खंडित होने पर भी होती है क्योंकि मूर्ति देव का स्वरूप है और शिवलिंग एक प्रतीक है राष्ट्र एक स्वरूप है न कि एक प्रतीक अतएव भारत के मौलिक स्वरूप को देवत्व प्रदान कर हम मां भारती की पूजा करते हैं यही पूजा गायन्ति देवा किल गीतकानि धन्यास्तु थे भारत भूमि भागे; आसिंधु सिंधु पर्यंत यस्य भारत भूमिका मातृभू पुण्य भूश्चैव हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् स्मृत: की सांगोपांग सविधि पूजा होगी भारत का समग्र स्वरूप प्राप्त करना एक अभीष्ट संकल्प है जिसे सिद्धि...