जिहाद से कहां तक बचेंगे अब तो वह हर जगह मौजूद है इस विनाशक रोग को हमने फैलने दिया हिंदु अपने व्यवसाय छोड़ बेरोजगार की पंक्ति बढ़ाते रहे सरकारी नौकरी की तलाश में और 'वे' आपके पारंपरिक व्यवसाय के छोड़े साम्राज्य पर वर्चस्व बढ़ाते रहे नाई से लेकर सब्जी मंडी सब पर वे अपना अधिकार कर चुके हैं हलाल अर्थव्यवस्था के नाम पर थूके उच्छिष्ट सामान्य उपयोग से लेकर हर जगह पर आप इनके चपेट में आ चुके हैं अब केवल दहलीज और आपका दरवाजा बचा है वह भी कब तक यह आपके ऊपर है सरकार सुरक्षा दे सकती है कर नहीं सकती उतना आपको और अपने परिवार के लिए स्वयं करना होगा वह दिन दूर नहीं जब आप रलीव सलीव गलीव समाचार में नहीं देखने वाले अपितु आपका हश्र स्वयं समाचार बन चुका होगा आपके बाद जागें जगायें सनातन एकता बढ़ायें अन्यथा 'वे पंद्रह दिन'हकीकत होने वाले हैं जय श्री राम जय हिंदुत्व जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं भारतम् 🚩
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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