हम जब तक प्रकृति पूजक रहे प्रकृति हमारा संरक्षण करती रही जैसे ही निहित स्वार्थ के लिए हमने प्रकृति का शोषण दोहन प्रारंभ किया प्रकृति सहनशीलता की सीमा का उल्लंघन होते ही आज प्रतिशोधात्मक आक्रामक हो उठी यह स्वाभाविक है प्रकृति के साथ मनुष्य का संबंध माता पुत्र का है जब हम मालिक बन बैठे तो यही होना था जो हो रहा है हमें प्रकृतिमित्रवत् होना ही होगा अगर पृथ्वी एवं जीवन को हमें सुरक्षित रखना है जयतु सनातनम् जयतु भारतम् जय श्री राम

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