यह हमारे स्वाभिमान का संघर्ष है धर्म की हानि कदापि नहीं भूलना है भारत के खोए गौरव को प्राप्त कर ही विश्राम लेंगे यह प्रण हर सनातन हृदय में होना चाहिए कितना समझौता करें गूगल करें ६०,००० मंदिर ध्वस्त हुए ३०,००० पर हम आ गए फिर ३ अयोध्या काशी मथुरा पर आज हमें सतत संघर्ष बहुआयामी धर्म युद्ध से विजय मिल रही है हम याचना नहीं रण कर रहे हैं कितने अपनों को खो चुके हैं कितने लोगों के जीवन का अंतिम ध्येय बन खड़े हैं इदम् राष्ट्राय इदम् राष्ट्राय स्वाहा इदन्न मम भाव से एक शक्ति धर्म शक्ति बन खड़े हैं स्वयमेव मृगेन्द्रता भाव से हमें खड़े रहना होगा अभी नहीं तो कभी नहीं ऐसा अवसर प्राप्त हो न हो यह एक दृढ़ प्रतिज्ञ संकल्पित राष्ट्र की अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है यह समझना आवश्यक है दायित्व बोध कर्तव्य बोध से अपनी भूमिका क्षमतानुसार स्वयं निर्धारित कर इस राष्ट्र यज्ञ की आहुति बनना होगा सादर प्रणाम जय श्री राम वंदे मातरम् 🚩🙏 जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् 🚩🙏
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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