भारत के वैभव एवं शौर्य का सत्य इतिहास सामने लाने और सार्वजनिक करने की आवश्यकता है यह कार्य बहुत सुंदर ढंग से गीता प्रेस,अमर चित्र कथा,भारत भारती आदि करते रहे हैं उनका योगदान अमूल्य है हमारा वास्तविक इतिहास साहित्य एवं लोक संस्कृति में बिखरा है उसे संजोने की आवश्यकता है मोहब्बत की फर्जी दूकान एवं इकोसिस्टम के मंसूबों को ध्वस्त करने हेतु यह करना आवश्यक है यह समझ कार्यान्वित करना होगा जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री कृष्ण 🏹🔱🦚🎯🥷🚩🙏 वंदे मातरम् 🚩🙏
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
Comments
Post a Comment