भारत की जय यात्रा जिन्हें रास नहीं आती भारत की गौरव गाथा जिन्हें नहीं भाती गैरों को अपना मान उनका यश मान सदा करते अधिकार नहीं भारत पर उनका जाने की तैयारी आज करें यह याद रखें वे उनकी उपस्थिति हमें नहीं भाती भारत के यश जय में जो अपनापन मानें मां भारती को जो माता मानें वंदे मातरम् के जयघोष में अपना गौरव जय समझें मात्र उन्हीं को हम अपना माने भारत में रहना है जिसको वंदे मातरम्,जय श्री राम कहना होगा असुविधा, असुरक्षा जिसे लगे उसे यहां से निकलना होगा हमने आस्तीन के सांपों बीच पलना छोड़ दिया छद्म पंथ निरपेक्ष सत्ता लोलुप हथकंडों में फंसना छोड़ दिया यह हमारी मातृभूमि भारत है यह गर्व से समझना कहना होगा जिसे भारत में रहना है वंदे मातरम् कहना होगा (स्वरचित) जय मां भारती 🚩🙏 जय श्री राम वंदे मातरम् जयतु सनातनम् जयतु हिंदु राष्ट्रं अखंड भारतम् 🚩🙏
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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