जिन्हें भारत को मातृभूमि कहने में संकोच इन्कार है अर्थात वंदे मातरम् कहने में संकोच है उन्हें राष्ट्र में रहने का अधिकार नहीं भारत में रहना,सारी सुविधाओं का लाभ लेना और भारत के विरुद्ध विषबाण, विषाक्त षड्यंत्र रचने वाली शक्तियों के साथ भारत तेरे टुकड़े होंगे के कुत्सित मनोवृत्ति को कार्यान्वित करने वाले लोगों, राजनीतिक पेशेवर कुनबों जो जातिवाद, सांप्रदायिकता, राजनीतिक महत्वाकांक्षा को साधने के लिए वोट बैंक से सत्ता पाने की जुगाड़ में लगे लोगों, विचारधारा और गतिविधियों के साथ गलबहियां डाले उनके स्वर में एकलय हो रहे हैं वे स्पष्ट समझ लें उनका यह पारंपरिक स्वछंद स्वेच्छाचारी कलाबाजियां अब असह्य है और अनुशासनहीनता का अपराधानुरूप कठोरतम दंड मिल कर ही रहेगा शठं शाठ्यं समाचरेत पय: पानं भुजंगानाम केवलं विष वर्धनम हम अनुभव से भली भांति समझ चुके हैं वंदे मातरम् 🚩🙏

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