इस देश इंडिया का इतिहास विभाजन से और नेहरू गांधी की मुस्लिम तुष्टिकरण से प्रारंभ होता है धर्म के नाम पर राष्ट्र विभाजन हो दो देश बने हिंदू मुस्लिम की बात आज की परिस्थितियों को देखते हुए करना होगा आज बढ़ती जेहादी मानसिकता और मुस्लिम तुष्टिकरण पर हमें वे ३.५करोड़ मुस्लिम याद आते हैं जिन्हें गांधी नेहरू ने आपत्तियों को दरकिनार कर भारत में रोक लिया पर उस ओर के हमारे हिंदू भाइयों माताओं बहनों को अपने हाल पर छोड़ उनकी लाशों से भरी रेलगाड़ियों भेजे जाने के कारण बने आज वे ३.५करोड़ उनके हिसाब से २२ करोड़ हो चुके हैं जबकि वहाबी अपनी संख्या उजागर नहीं करते फिर बंग्लादेशी, रोहिंग्या को भी जोड़ने लगे तो यह संख्या विस्फोट के कगार पर है यह चिंता का विषय है और सुविज्ञ प्रबुद्ध वर्ग को चिंतन मंथन मार्गदर्शन देने की भूमिका निभाने को तैयार करना पड़ेगा जंगल की आग बुझाने को दूसरी आग लगानी पड़ती है दोनों आग मिलन बिंदु पर बुझ जाती हैं प्रचलित ईकोसिस्टम को निर्मूल करने के लिए काउन्टर सनातन ईकोसिस्टम तैयार करना होगा जो आत्मबलिदान कर प्रचलित ईकोसिस्टम को निर्मूल कर सके शेष फिर कभी जय श्री राम वंदे मातरम् 🚩🙏
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक विश्लेषण
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत राष्ट्र की मौलिक अवधारणा है सांस्कृतिक से संस्कारजन्य से अभिप्राय है संस्कार वैदिक पृथ्वी सूक्त के माता भूमि: पुत्रोहं पृथवया से है जो हमारा मातृभूमि से मत पुत्र का संबंध स्थापित करता है जो एक नैसर्गिक सत्य है मत एवं पुत्र का संबंध पवित्रताम एवं दैवीय है पारंपरिक स्थापना से निष्ठा का जन्म होता है मत पुत्र संबंध के चलते हम मातृभूमि कहते हैं सम्पूर्ण विश्व मे हम ही अकेले मातृभूमि कहते हैं राष्ट्र औरों के लिए एक भूमि का टुकड़ा अथवा एक भौगोलिक पहचान होगी हम हमारे वैदिक ऋषि पूर्वजों के पाठ पर चल भारत को जीवंत राष्ट्र देव मानते आए हैं यह एक स्थापित सत्य है अतः निष्ठा एक मौलिक आधार है जो हमे राष्ट्र भाव से ओतप्रोत करता है भारत के वैदिक मूल की सजीवनी हमारे ऋषि पूर्वजों द्वारा प्रदत्त सत्य सनातन वैदिक धर्म है सर्वं खलविदं ब्रह्म के ओजस्वी विचारधारा से विश्व को ब्रह्म का रूप जान नदियों,पर्वतों,वनस्पतियों,प्रकृति की हम पूजा करते हैं एकां सद विप्र बहुधा वदंति के अनुसार हम सर्व धर्म समभाव मे विश्वास रखते हैं एक परमेश्वर को विभिन्न दृष्टिक...
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