चेतना के स्वर ~
है सृष्टि का आदि स्वर संस्कृति सभ्यता का प्रस्फुटन वही मानव सभ्यता की प्रथम एवं अंतिम आशा है शाश्वत सत्य आज वही आशा, उत्साह,उछाह देता आदि स्वर आज वही शाश्वत सत्य सनातन चिरंतन शक्ति बना आज भी सही आक्रमणों का पथ स्वीकारा ना धर्म विस्तार हेतु कभी अपनाया उसे जो सताया था अपघात सहे अपनों से ही आक्रमणों के खौफनाक दौरों को झेल डटे हम आज अभी सभ्यताओं को इतिहास बनते देखा पर आज भी हमारा अस्तित्व सही तूफानों के झकझोरों में अपने स्व से हम आज खड़े ईसा मूसा की ताकत को तलवारों से हमने तौला सर कटाना स्वीकार किया पर मरते दम तक मां का आंचल ना छोड़ा ललनाओं ने भी जहां स्वाभिमान रक्षा हेतु जौहर अथवा खड्ग थामा रण में चंडी, देवी, प्रलयंकर शिव शक्ति बन तांडव केसरिया व्रत थामा हम वही प्रताप शिवा के वंशज आज उनींदे आज हुए एक बार फिर अरि दल सीमा पर ललकार रहा पुनः प्रताप शिवा तेज शौर्य जगा प्रतिकार हेतु डट खड़े होना होगा इतिहास हमें नहीं बनना इतिहास पुनः रचना होगा
जय मां भवानी जय मां भारती 🚩🙏§ आशुतोष (स्वरचित)
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