अत्यंत आवश्यक है कि जातिवाद के भ्रम को जो सुनियोजित ढंग से हमारे मानस तंत्र में बैठा दिया गया उस भ्रमजाल को तोड़ने का काम करना होगा जाति यदि जात से लिया है तो यह एक संस्कृत शब्द है जिसका अभिप्राय जन्म से है यह शब्द गीता में भी आता है वहां भी इसका अर्थ जन्म ही है इसका वैदिक वर्ण व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है पाश्चात्य सभ्यता में कास्ट एवं क्लास शब्द समाज के वर्गीकरण हेतु प्रयुक्त होते रहे वैदिक सनातन भारत में गुण एवं कर्म के अनुसार श्रीमद्भगवद्गीता में सृष्टि अर्थात समाज की वर्ण व्यवस्था का निर्धारण भगवान श्री कृष्ण ने बताया है, मनुस्मृति में चारों वर्णों का वर्णन प्राप्त होता है कास्ट एक पुर्तगाली शब्द कास्टा से लिया गया है जो उन्होंने गोआ में मूल निवासी को अपने से पृथक करने के लिए प्रयुक्त किया था हर्बर्ट रिजली ने एक अध्ययन में भारतीय समाज का वर्गीकरण किया था यह पहली बार हुआ था आचार्य चाणक्य के अर्थशास्त्र एवं मेगैस्थनीज के इंडिका में भी ऐसा वर्गीकरण प्राप्त होता है परन्तु यह वर्गीकरण व्यवसाय एवं भूमिका पर आधारित थी कहने का तात्पर्य है यह वर्गीकरण था न कि विभाजन यह ध्यान रखना आवश्यक है
जयतु सनातनम् जयतु भारतम् 🚩🙏
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